नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को सड़क पर उतर आए। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का शिकार हुए 19 वर्षीय साहिल को लेकर राहुल गांधी सीधे संसद मार्ग थाने पहुंचे। जब पुलिस ने मामले की FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया, तो राहुल गांधी थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए।

इस मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक इस घटना की गूंज सुनाई दे रही है।

थाने में क्यों धरने पर बैठे राहुल गांधी?

छात्र साहिल लोचव और उनके वकीलों ने 14 अगस्त को ही दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने जांच अधिकारी (I/O) का नंबर देने से मना कर दिया। इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस की तरफ से न तो कोई जवाब मिला और न ही शिकायत की कोई रसीद दी गई। इसी लापरवाही और देरी के विरोध में राहुल गांधी ने थाने का घेराव किया।

कौन है पीड़ित छात्र साहिल?

  • बैकग्राउंड: 19 साल का साहिल दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का रहने वाला है और दिल्ली विश्वविद्यालय (SOL) का छात्र है। साहिल पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखता था।

  • क्या हुआ था: 20 जुलाई को CJP के 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई में उसे पैलेट गन लगी थी।

  • आंख की रोशनी गई: इस चोट के कारण साहिल की दाहिनी आंख की रोशनी चली गई है। दिल्ली के एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में उसकी सर्जरी हुई है। परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि आंख की पुतली बुरी तरह डैमेज हो चुकी है और रोशनी वापस लौटने की उम्मीद सिर्फ 1% है।

संसद में भी उठा था पैलेट गन का मुद्दा

राहुल गांधी ने मानसून सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने सीधा आरोप लगाया था कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर गोली और पैलेट गन चलाई गई।

  • सरकार का जवाब: संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे निराधार बताया था और राहुल से माफी की मांग की थी।

  • असंसदीय शब्दों पर बवाल: अपनी स्पीच में राहुल ने 18 साल की एक छात्रा 'लवली' से बातचीत का जिक्र करते हुए 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। भारी हंगामे के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने इन शब्दों को कार्यवाही से हटा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-लेवल जांच कमेटी

संसद मार्च के दौरान पुलिस की इस हिंसक कार्रवाई के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए 5 सदस्यों की एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया है:

  • अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी।

  • अन्य सदस्य: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई।

दिल्ली पुलिस की सफाई: 'प्रदर्शन गैरकानूनी था'

सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने अपना बचाव करते हुए कहा कि 20 जुलाई का जंतर-मंतर से संसद मार्च पूरी तरह से गैरकानूनी था और इसकी अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस का दावा है कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कई 'हिस्ट्रीशीटर' (अपराधी) भी घुस आए थे। भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़े और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, लेकिन यह बल प्रयोग जरूरत से ज्यादा नहीं था।