1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सज्जन कुमार दिसंबर 2018 से जेल में बंद थे और उन्होंने लगभग 7 साल 8 महीने जेल में बिताए।
अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम
सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, जब उन्हें वहां पहुंचाया गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
सज्जन कुमार से जुड़े 3 प्रमुख मामले और अदालत के फैसले
1984 के दंगों से जुड़े मुख्य मामलों में सज्जन कुमार का नाम शामिल था, जिनमें से दो मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई और एक में वे बरी हुए:
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पालम कॉलोनी (दिल्ली कैंट) मामला: दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के बाद से वे लगातार जेल में थे।
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सरस्वती विहार मामला: 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फरवरी 2025 में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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सुल्तानपुरी मामला: सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या के मामले में सितंबर 2023 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।
1984 सिख दंगों की पृष्ठभूमि और कानूनी घटनाक्रम
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। इन दंगों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में करीब 2,700 और देशभर में 3,500 से अधिक निर्दोष लोगों की जान गई थी।
दंगों के समय सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से कांग्रेस के सांसद थे और उन पर भीड़ को भड़काने व हिंसा की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगे थे।
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मई 2000: दंगों की निष्पक्ष जांच के लिए जस्टिस जीटी नानावटी कमीशन का गठन किया गया।
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अक्टूबर 2005: नानावटी कमीशन की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नए सिरे से केस दर्ज किए।
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2010–2013: ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार समेत अन्य आरोपियों को समन किया। 2013 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी किया, जिसके खिलाफ CBI और पीड़ितों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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दिसंबर 2018: दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
2005 में दंगों के 21 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संसद में सिख समुदाय से माफी मांगते हुए कहा था कि इस घटना से पूरे देश का सिर शर्म से झुक जाता है। लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद तिहाड़ में सजा काट रहे सज्जन कुमार के निधन के साथ ही 1984 दंगों से जुड़े एक बड़े कानूनी अध्याय का अंत हो गया है।