नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में संशोधन विधेयक पेश किया, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

खड़गे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में लगभग 1.25 लाख छात्रों ने आत्महत्या की, जो शिक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लंबे समय तक छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया और जब देशभर में आंदोलन तेज हुए, तब दबाव में आकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और संशोधन विधेयक लाया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार यदि पहले ही छात्रों की बात सुन लेती तो प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। उनका कहना था कि छात्रों के हितों की रक्षा करने के बजाय सरकार ने काफी देर से कदम उठाए।

पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए संशोधन विधेयक पर खड़गे ने कहा कि इसमें केवल आंकड़ों और दंड के प्रावधानों में बदलाव किया गया है, लेकिन परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। उनके अनुसार केवल जुर्माना बढ़ाने, सजा कड़ी करने, स्पेशल टास्क फोर्स बनाने या फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने से समस्या खत्म नहीं होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 152 प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, लेकिन दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिल सकी। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है।

सदन में खड़गे ने छात्रों के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किए गए। इस मामले में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा और कहा कि यदि सरकार जवाब नहीं दे सकती तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

बहस के दौरान खड़गे ने नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल कुछ ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों को बढ़ावा देना उचित नहीं है, जिनसे समाज में भेदभाव की भावना पैदा हो। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया और सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।

उधर, सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई करना, संगठित पेपर लीक गिरोहों पर लगाम लगाना और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना है। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद पारित हो चुका था, जिसके बाद इसे राज्यसभा में पेश किया गया। संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के भविष्य को लेकर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।