जयपुर। राजस्थान सरकार की तिजोरी में अपराधियों से जब्त किया गया करीब 64.44 करोड़ रुपए मूल्य का 29.011 किलोग्राम सोना और 972.75 किलोग्राम चांदी वर्षों से सुरक्षित रखा हुआ है। हालांकि इसका मूल्यांकन (वैल्यूएशन) पहले ही हो चुका है, लेकिन अब तक नियमानुसार इसका निस्तारण नहीं किया गया। इस मामले को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी ताजा ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए राज्य सरकार को जल्द कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

 यह सोना-चांदी पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा अलग-अलग मामलों में जब्त किया गया था। बाद में संबंधित अदालतों ने इन्हें राजकीय संपत्ति घोषित कर दिया। इसके बावजूद मई 2025 तक यह बहुमूल्य धातु सरकारी तिजोरी में ही पड़ी रही और इसे नियमों के अनुसार न तो बेचा गया और न ही इसका मॉनेटाइजेशन किया गया।

जयपुर का रिजर्व कोषागार बना है सुरक्षित भंडारण केंद्र

राजस्थान कोषागार नियमावली-2012 के नियम 122 के तहत कोषालय जयपुर (शहर) को राज्य का रिजर्व कोषागार घोषित किया गया है। अदालतों द्वारा सरकारी संपत्ति घोषित किए गए सोना, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य सामान इसी सुरक्षित कोषागार में जमा किए जाते हैं।

दो श्रेणियों में रखा जाता है जब्त सामान

वित्त विभाग ने जब्त बहुमूल्य वस्तुओं को दो श्रेणियों में बांटा है। पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं – इन्हें पुरातत्व विभाग को सौंपा जाना होता है। अन्य सोना-चांदी एवं बहुमूल्य धातुएं – इन्हें भारत सरकार की मुंबई स्थित टकसाल भेजकर शुद्ध धातु में परिवर्तित किया जाता है और बाद में बेचकर सरकार के राजस्व में शामिल किया जाता है।

वैल्यूएशन हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं को छोड़कर बाकी सोना-चांदी का मूल्यांकन पहले ही पूरा हो चुका है। इसके बावजूद नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।

कैग ने निदेशक एवं पदेन संयुक्त शासन सचिव, निदेशालय कोष एवं लेखा को निर्देश जारी करने की सिफारिश की है ताकि जयपुर शहर के सुरक्षित कोषागार में रखे सोना-चांदी का शीघ्र निस्तारण किया जा सके।

देरी से सरकार पर बढ़ रहा खर्च

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक बहुमूल्य धातुओं को सरकारी तिजोरी में सुरक्षित रखने से सुरक्षा, रखरखाव और संरक्षण पर अतिरिक्त खर्च बढ़ता है। समय पर निस्तारण नहीं होने से सरकार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

35 साल पुराने खर्च का हिसाब भी अधूरा

कैग की रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी एक और बड़ी अनियमितता सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 35 वर्षों से 17 मामलों में 29.79 करोड़ रुपए के सरकारी खर्च का पूरा हिसाब सरकार उपलब्ध नहीं करा सकी है।

ये सभी मामले एडवांस कंटींजेंसी (AC) बिल से जुड़े हैं। नियमों के अनुसार, तत्काल जरूरत के लिए जारी की गई राशि के बाद संबंधित विभागों को निर्धारित समय सीमा में डिटेल्ड कंटींजेंसी (DC) बिल प्रस्तुत करना होता है, जिसमें खर्च का पूरा विवरण दिया जाता है।

लेकिन 17 मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इनमें कुछ मामले 1990-91 से लंबित हैं। कैग ने इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन बताते हुए सभी लंबित मामलों का जल्द निस्तारण करने और जवाबदेही तय करने की सिफारिश की है।

CAG की प्रमुख सिफारिशें

सरकारी तिजोरी में रखे 64.44 करोड़ रुपए मूल्य के सोना-चांदी का जल्द नियमानुसार निस्तारण किया जाए।

बहुमूल्य धातुओं को मुंबई टकसाल भेजकर शुद्ध धातु में परिवर्तित कर नीलाम किया जाए।

लंबित एसी और डीसी बिलों का शीघ्र समायोजन कर वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

सरकारी संपत्तियों के रखरखाव पर बढ़ रहे अनावश्यक खर्च को कम करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए।