जयपुर। राजस्थान सरकार ने इस बार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ा और सख्त फैसला लिया है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने 1 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार अपनी अचल संपत्ति (Immovable Property Return-IPR) का विवरण निर्धारित समय तक जमा नहीं कराया, उनकी जुलाई 2026 की वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) रोक दी गई है। इस फैसले से राज्य के 2 लाख 64 हजार 913 अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित होंगे। इसके साथ ही ऐसे कर्मचारियों के पदोन्नति (प्रमोशन) पर भी असर पड़ सकता है।
हर साल जुलाई महीने में सरकारी कर्मचारियों को 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ मिलता है, लेकिन इस बार संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि के आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
31 जनवरी तक देना था संपत्ति का विवरण
कार्मिक विभाग (डीओपी) ने 31 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी अचल संपत्ति का विवरण ऑनलाइन जमा कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 2.64 लाख से अधिक कर्मचारियों ने समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
कार्मिक विभाग के अनुसार, विभागाध्यक्षों द्वारा वार्षिक वेतन वृद्धि के आदेश आईपीआर (Immovable Property Return) के आधार पर जारी किए जाते हैं। जिन कर्मचारियों ने यह जानकारी नहीं दी, उनके वेतन वृद्धि के आदेश जारी नहीं किए गए।
जुलाई के वेतन बिल पर पड़ेगा असर
आमतौर पर जुलाई के पहले दस दिनों में वार्षिक वेतन वृद्धि के आदेश जारी हो जाते हैं। 15 जुलाई से वेतन बिल बनने शुरू हो जाते हैं और 20 से 25 जुलाई के बीच इन्हें कोषालय भेजा जाता है। इस बार संबंधित कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतन का लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार क्यों हुई सख्त?
कार्मिक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार सरकारी कर्मचारियों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है। यदि इस बार भी ढील दी जाती तो भविष्य में भी कर्मचारी संपत्ति का विवरण समय पर जमा नहीं करते।
कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव धीरज कुमार ने कहा कि उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि जिन कर्मचारियों ने संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया है, उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जाए। सरकार नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहती है।
प्रमोशन पर भी पड़ सकता है असर
कार्मिक विभाग के अनुसार, संपत्ति का विवरण नहीं देने वाले कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotion) की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। विभागीय रिकॉर्ड और सेवा संबंधी मामलों में आईपीआर महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।
कर्मचारी संगठनों ने जताई नाराजगी
कर्मचारी नेता गजेंद्र सिंह राठौड़ ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कई कर्मचारी सरकारी कार्यों में व्यस्त होने के कारण समय पर संपत्ति का विवरण जमा नहीं कर पाए। सरकार को ऐसे कर्मचारियों को एक और अवसर देना चाहिए था। उनका कहना है कि वार्षिक वेतन वृद्धि रोकना उचित कदम नहीं है।
क्या है कार्मिक विभाग की भूमिका?
राजस्थान का कार्मिक विभाग (Department of Personnel - DOP) राज्य सेवा अधिकारियों की भर्ती, नियुक्ति, पदोन्नति, तबादले और प्रशासनिक मामलों का संचालन करता है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं की निगरानी भी यही विभाग करता है। इसी विभाग के निर्देशों के आधार पर वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य प्रशासनिक निर्णय लागू किए जाते हैं।