राजस्थान में सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस भर्ती को रद्द करने के एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया है कि यह भर्ती अब बहाल नहीं की जाएगी।
शनिवार (4 अप्रैल) को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों और राज्य सरकार द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया और एकलपीठ के निर्णय को सही ठहराया। हालांकि, डिवीजन बेंच ने एकलपीठ द्वारा आरपीएससी (राजस्थान लोक सेवा आयोग) के सदस्यों के खिलाफ लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान (सुओ मोटू) को निरस्त कर दिया।
पेपरलीक और अनियमितताओं पर सख्त रुख
इस मामले की जड़ में भर्ती परीक्षा में सामने आए पेपरलीक, धांधली और गंभीर अनियमितताएं थीं। एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को इन कारणों के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे भर्ती को जारी रखना न्यायसंगत नहीं होगा।
ढाई महीने पहले सुरक्षित रखा गया था फैसला
डिवीजन बेंच ने 19 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। करीब ढाई महीने बाद अब इस पर अंतिम निर्णय सुनाया गया है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर विराम लग गया है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
एकलपीठ के फैसले के बाद 8 सितंबर 2025 को डिवीजन बेंच ने अंतरिम राहत देते हुए भर्ती रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को सुनवाई करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही हाईकोर्ट की खंडपीठ को तीन महीने के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करने को कहा था।
अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका
अब डिवीजन बेंच के अंतिम फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि एसआई भर्ती-2021 पूरी तरह से रद्द ही रहेगी। इससे चयनित उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है, वहीं राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
आगे क्या?
इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के सामने नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का विकल्प बचता है। साथ ही यह मामला भविष्य की भर्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बनेगा, जहां परीक्षा की निष्पक्षता पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।