करीब सवा सौ साल के गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समेटे बाड़मेर रेलवे स्टेशन ने एक और ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है। कभी टीन के छप्पर और गोल छत वाली इमारत के रूप में पहचान रखने वाला यह स्टेशन अब अमृत भारत योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित रेलवे स्टेशन बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से इसका लोकार्पण किया। इस अवसर पर बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदा राम बेनीवाल, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, बायतु विधायक आदूराम मेघवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

बाड़मेर रेलवे स्टेशन का इतिहास वर्ष 1899 से जुड़ा हुआ है। जोधपुर के तत्कालीन महाराजा सरदार सिंह के सुझाव पर सादड़ी, पाली, बालोतरा और बाड़मेर के बीच रेलवे लाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ। इसके बाद 22 दिसंबर 1900 को बाड़मेर से कराची तक 74 मील लंबी रेल लाइन जोड़ दी गई, जिससे यह स्टेशन भारत और तत्कालीन सिंध क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण रेल संपर्क का केंद्र बन गया। आजादी के बाद भी वर्ष 1965 तक यहां से कराची के लिए रेल सेवा संचालित होती रही।

वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 8 और 9 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना ने बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर बमबारी की थी। रेलवे स्टेशन के पास डीजल के ड्रम रखे हुए थे, लेकिन समय रहते उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस हमले के बावजूद रेलवे संचालन पूरी तरह ठप नहीं हुआ और स्टेशन ने अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

अंग्रेजों के समय स्टेशन की इमारत गोलाकार छतों वाली विशेष वास्तुकला में बनाई गई थी। पत्थर से निर्मित इन भवनों की गोल छतें गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में अनुकूल रहती थीं तथा मजबूती के लिए जानी जाती थीं। लंबे समय तक यही भवन बाड़मेर रेलवे स्टेशन की पहचान बना रहा।

साल 2005-06 में तत्कालीन रक्षामंत्री जसवंत सिंह के प्रयासों से जोधपुर-मुनाबाव रेलखंड को मीटरगेज से ब्रॉडगेज में परिवर्तित किया गया। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार और जसवंत सिंह की मौजूदगी में मालाणी एक्सप्रेस की शुरुआत हुई, जिससे बाड़मेर रेलवे स्टेशन के विकास को नई गति मिली। इसके बाद फरवरी 2006 में भारत-पाकिस्तान के बीच थार एक्सप्रेस सेवा शुरू हुई, जिसने जोधपुर और पाकिस्तान के खोखरापार को जोड़ा। इस रेल सेवा के कारण बाड़मेर और मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।

वर्ष 2006 में स्टेशन का पहला बड़ा कायाकल्प हुआ, जिसमें नया भवन, प्लेटफॉर्म विस्तार और रेलवे वाशिंग लाइन जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। अब वर्ष 2026 में अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। नया भवन अत्याधुनिक सुविधाओं, आकर्षक डिजाइन और बेहतर यात्री सुविधाओं से लैस है। शहर के प्रवेश द्वार के रूप में स्थित यह स्टेशन अब बाड़मेर की नई पहचान बनकर उभरा है और शहर की सबसे खूबसूरत इमारतों में शामिल हो गया है।