राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की वर्ष 2022 की हिंदी लेक्चरर (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। SOG ने जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि उसने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के नाम पर फर्जी एमए (हिंदी) की डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई थी।

SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री जमा कराई थी। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान पता चला कि यह डिग्री विश्वविद्यालय की ओर से जारी ही नहीं की गई थी। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया।

जांच में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थी ने फर्जी डिग्री, फर्जी मार्कशीट और झूठे शपथ पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश की थी। जांच आगे बढ़ी तो SOG को पता चला कि अशोक विश्नोई ने इस पूरे मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाई। उसने महेंद्र सिंह राव के माध्यम से डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क किया और उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए फर्जी डिग्री और मार्कशीट की व्यवस्था करवाई।

SOG की जांच में यह भी सामने आया कि अशोक विश्नोई ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंदुल से संपर्क कर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए। जांच एजेंसी का कहना है कि अशोक की भूमिका से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।

अदालत ने आरोपी को 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। इस दौरान उससे पूछताछ कर पूरे फर्जी डिग्री नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। SOG यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

SOG के मुताबिक, इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी समेत कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अशोक विश्नोई के खिलाफ फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने से जुड़ा एक और मामला भी अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज है, जिसमें उसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। इसके अलावा वह जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी पहले गिरफ्तार हो चुका है।

जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस फर्जी डिग्री रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।