सीकर। शेखावाटी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसके (SK) हॉस्पिटल में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के मेडिसिन फीमेल वार्ड नंबर-53 में देर रात फॉल सीलिंग टूटकर गिर गई। गनीमत रही कि सीलिंग पहले से झूलने लगी थी, जिसे देखकर नर्सिंग स्टाफ और मरीजों के परिजनों ने तुरंत सभी मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। इसी वजह से बड़ा हादसा होने से बच गया।
यह घटना बुधवार देर रात करीब 1:30 बजे की है। उस समय वार्ड में 9 महिला मरीज भर्ती थीं। मरीजों के परिजन वार्ड में भोजन कर रहे थे, तभी छत की फॉल सीलिंग अचानक झूलने लगी। स्थिति को भांपते हुए नर्सिंग स्टाफ ने सभी मरीजों और उनके परिजनों को तुरंत सीलिंग के नीचे से हटाया। कुछ ही देर बाद पूरी फॉल सीलिंग टूटकर नीचे गिर गई। एहतियात के तौर पर सभी नौ मरीजों को अस्पताल की लॉबी और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
अस्पताल प्रशासन ने PWD पर लगाए लापरवाही के आरोप
एसके हॉस्पिटल की पीएमओ डॉ. प्रियंका अमन ने बताया कि अस्पताल की कई इमारतों में लंबे समय से मरम्मत की जरूरत है। इस संबंध में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मरीजों को नहीं हटाया जाता तो यह घटना गंभीर हादसे में बदल सकती थी।
करोड़ों का बजट, फिर भी अधूरा रखरखाव
पीएमओ के अनुसार अस्पताल की मरम्मत और रखरखाव के लिए 1.12 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, लेकिन PWD ने केवल 48 लाख रुपये ही खर्च किए। इसके बावजूद अस्पताल में आवश्यक मेंटिनेंस कार्य पूरे नहीं किए गए और काम पूरा होने का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।
78.40 लाख का मेंटिनेंस कार्य अब भी अधूरा
अस्पताल प्रबंधन और PWD के बीच पिछले वर्ष 78.40 लाख रुपये के रिपेयरिंग और मेंटिनेंस कार्य का एमओयू हुआ था। इसके तहत छत की मरम्मत, एल्युमिनियम पार्टिशन, लोहे की रेलिंग और फॉल सीलिंग का कार्य किया जाना था। हालांकि, करीब 11 महीने बीत जाने के बाद भी केवल आधी छत का वाटरप्रूफिंग कार्य ही पूरा हो पाया है। शेष हिस्से की मरम्मत अब तक अधूरी है। लगातार सीलन के कारण अस्पताल के कई वार्डों की फॉल सीलिंग क्षतिग्रस्त हो चुकी है और जगह-जगह टूट रही है।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में दहशत का माहौल है। यह हादसा सरकारी अस्पतालों में रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। समय रहते मरीजों को हटाने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन अस्पताल की जर्जर हालत को देखते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है। अब मरीजों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल भवन की जल्द मरम्मत कराए जाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।