बालोतरा जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र में किसानों का लंबे समय से चला आ रहा गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा। मंगलवार को सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों पर सवार होकर एसडीएम कार्यालय की ओर धरना देने निकले, लेकिन पुलिस ने रास्ते में कई जगहों पर बेरिकेड्स लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान भीड़ ने बेरिकेड्स उठाकर फेंक दिए और तीखी नारेबाजी की।
किसान नेता और गुड़ामालानी के निर्वर्तमान प्रधान बिजलाराम (बिजलाराम चौहान) घटनास्थल पर पहुंचे और एसडीएम को फोन पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने एसडीएम से कहा- "SDM-साहब आप नेताओं की वजह से बदमाशी कर रहे हो। एक के चक्कर में आप बलि चढ़ जाओगे।" बिजलाराम ने आगे कहा कि किसानों की मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं, लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन हमें रोका जा रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसान लंबे समय से निम्नलिखित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं:
फसल बीमा क्लेम का समय पर भुगतान
रबी-खरीफ फसल के लिए लंबित आदान अनुदान की राशि जारी करना
धरना स्थल और केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र) की जमीन से अतिक्रमण हटाना
जंगली सूअरों के आतंक से राहत
बिजली-पानी संबंधी समस्याओं का समाधान
अन्य कृषि संबंधित मांगें (कुल 11 सूत्री मांगें)
घटनाक्रम और पिछला इतिहास
5 दिसंबर 2025: किसानों ने एसडीएम गुड़ामालानी को विस्तृत मांग-पत्र सौंपा और आंदोलन की चेतावनी दी।
9 दिसंबर 2025: सैकड़ों (करीब 200) ट्रैक्टरों का काफिला लेकर किसान बाड़मेर/बालोतरा जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) का घेराव करने निकले। अहिंसा सर्कल पर जुटे हजारों किसानों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, वार्ता के बाद किसान वापस लौट गए थे और प्रशासन ने मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
धोरीमन्ना में वार्ता: वहां भी किसानों को रोका गया, जहां एक महीने में सभी मांगों को पूरा करने का वादा किया गया।
वर्तमान स्थिति: डेढ़ महीने (लगभग 40-45 दिन) बीत जाने के बाद भी मांगों पर मात्र 10 प्रतिशत ही काम हुआ है। इससे आक्रोशित होकर किसान फिर से सड़कों पर उतर आए। नीबड़ी फांटा और अन्य स्थानों पर ट्रैक्टरों को रोका गया, जहां कई दौर की बातचीत हुई लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।गुड़ामालानी क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। किसान आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और उनकी वैध मांगों को अनसुना किया जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा, जिसमें हजारों किसान और युवा शामिल होंगे।