आज के दौर की आधुनिक चकाचौंध और महंगे गैजेट्स की लत किस कदर जानलेवा हो सकती है, इसका  उदाहरण छत्रपति संभाजीनगर में देखने को मिला है। यहां एक महंगे आईफोन (iPhone) की चाहत और उसकी किस्त न चुका पाने के तनाव में एक हंसता-खेलता परिवार चंद सेकंड में खत्म हो गया। शुक्रवार, 21 अगस्त को तिसगांव की 'खावल्या' पहाड़ी से गिरकर 19 वर्षीय कुणाल छांगुड़े, उसके पिता मुरलीधर (48) और मां संगीता छांगुड़े (42) की दर्दनाक मौत हो गई।

आखिर क्या हुआ था 'खावल्या' पहाड़ी पर?

जानकारी के अनुसार, आईफोन की ईएमआई बाउंस होने से परेशान कुणाल शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे आत्महत्या के इरादे से 'खावल्या' पहाड़ी पर चढ़ गया था। सूचना मिलते ही ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे। माता-पिता भी बेटे को समझाने और बचाने के लिए पहाड़ी पर गए। इसी बीच, पिता मुरलीधर ने कुणाल को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की, लेकिन दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे सैकड़ों फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरे। पति और जवान बेटे को आंखों के सामने पहाड़ से गिरता देख मां संगीता इस गहरे सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाईं और उन्होंने भी उसी जगह से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी।

EMI बाउंस होने पर हुआ था विवाद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। कुणाल के पिता मुरलीधर पेशे से एक ट्रक ड्राइवर थे और घटना से दो दिन पहले ही ड्यूटी से घर लौटे थे। घर आते ही कुणाल ने इस बात पर झगड़ा शुरू कर दिया कि उसके आईफोन की किस्त बाउंस हो गई है। आर्थिक तंगी के कारण पिता ने तुरंत पैसे देने में असमर्थता जताई और उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुणाल कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था।

सुसाइड की धमकी देकर ही जिद से लिया था आईफोन

कुणाल पढ़ाई में एक होनहार छात्र था। उसने 10वीं कक्षा में 92% अंक हासिल किए थे और वर्तमान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) की तैयारी कर रहा था। लेकिन उसकी गैजेट्स की लत उसके भविष्य पर भारी पड़ गई। बताया जा रहा है कि पिछले साल भी उसने आईफोन खरीदने के लिए माता-पिता पर दबाव डाला था और तब भी पहाड़ी पर जाकर आत्महत्या करने की धमकी दी थी। बेटे की जिद के आगे हार मानकर माता-पिता ने उसे किस्तों पर महंगा फोन तो दिला दिया, लेकिन अब उसकी किस्तें चुकाना परिवार के लिए भारी पड़ रहा था।

बड़े बेटे को पहले ही खो चुका था परिवार

इस परिवार की त्रासदी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं थी। छांगुड़े परिवार पहले से ही भारी मानसिक तनाव और दुख के साये में जी रहा था। कुणाल का एक बड़ा भाई भी था, जिसका कुछ साल पहले एक गंभीर बीमारी के कारण निधन हो गया था। एक बेटे को पहले ही खो चुके माता-पिता कुणाल को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और एक जिद ने पूरे परिवार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।