राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बड़ा घोटाला सामने आया है। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में एक ही खेत और एक ही फसल पर बार-बार क्लेम उठाकर सरकारी व बीमा राशि में ₹31 लाख से अधिक की चपत लगाई गई। इस मामले में किसान, बटाईदार, सीएससी (e-मित्र) संचालक और बीमा कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत की जांच शुरू हो गई है।
एक खेत, 7 आवेदन और 4 बार पास हुआ क्लेम
सूरतगढ़ क्षेत्र के कालूसर गांव में खसरा नंबर 281/91 (रकबा 10.37 हेक्टेयर / करीब 40 बीघा) के मूल खातेदार बनवारी लाल ने खरीफ सीजन में मूंगफली की बुवाई दिखाई थी। एक ही जमीन पर अलग-अलग तरीकों से 7 बार आवेदन किए गए, जिनमें से 4 पॉलिसी पास हुईं और कुल ₹31,15,514 का क्लेम जारी हो गया:
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पहला क्लेम (ऋणी किसान): बनवारी लाल ने बैंक के जरिए बतौर ऋणी किसान बीमा कराया।
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दूसरा क्लेम (CSC 1): विकास कुमार नामक ई-मित्र संचालक से 10.37 हेक्टेयर का दूसरा बीमा कराया।
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तीसरा क्लेम (CSC 2): बिजेश नामक दूसरे ई-मित्र संचालक से 10.30 हेक्टेयर का तीसरा बीमा दर्ज कराया।
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किसान का कुल क्लेम: बनवारी लाल ने अकेले तीन पॉलिसियों से ₹23,35,319 का क्लेम हासिल किया।
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बटाईदार का चौथा क्लेम: इसी जमीन पर बटाईदार रिछपाल (पुत्र गिरधारी) ने अलग से बीमा कराकर ₹7,80,195 का क्लेम उठा लिया।
बीमा कंपनी के 'ऑटो-अप्रूवल' लूपहोल से हुआ खेल
जांच में सामने आया कि 'क्षेमा जनरल इंश्योरेंस' ने पहले आवेदन को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी। इसके बाद जब 3 आवेदन दोबारा आए, तो सिस्टम ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था।
इसके बाद मामूली बदलावों के साथ 3 और आवेदन पोर्टल पर डाले गए। नियमानुसार तय समय सीमा में आपत्ति दर्ज न होने के कारण सिस्टम ने इन्हें ऑटो-अप्रूव्ड कर दिया। बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के क्लेम की पूरी राशि संबंधित खातों में ट्रांसफर हो गई।
कृषि विभाग का एक्शन: प्रदेशभर में जांच के आदेश
मामले का खुलासा होते ही कृषि विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है:
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मिलीभगत की जांच: बीमा कंपनी के संबंधित कर्मचारियों, ई-मित्र संचालकों और क्लेम उठाने वाले व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रदेशव्यापी स्क्रूटनी: पूरे राजस्थान में खसरा नंबर, जमीन रकबा, फसल और एक ही जमीन पर मल्टीपल पॉलिसियों का डिजिटल मिलान शुरू कर दिया गया है।
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जयपुर और टोंक में FIR: इसी तरह के फर्जीवाड़े पर कार्रवाई करते हुए टोंक (मालपुरा) और जयपुर (शाहपुरा) में 5 किसानों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।