बाड़मेर जिले में संविदा नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच कांग्रेस जिला अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर आंदोलनरत नर्सिंगकर्मियों का समर्थन किया है। उनके बयान के बाद इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा भी तेज हो गई है।

लक्ष्मण सिंह गोदारा ने अपने पोस्ट में कहा कि पिछले कई दिनों से बाड़मेर जिले में संविदा नर्सिंगकर्मी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि हठधर्मिता छोड़कर प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और संविदा नर्सिंगकर्मियों की पीड़ा को समझना चाहिए।

गोदारा ने कहा कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे संविदा नर्सिंगकर्मियों को अचानक हटाने का निर्णय हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। ऐसे में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से संविदा नर्सिंगकर्मियों को पुनः बहाल करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में अनुभवी नर्सिंगकर्मियों को हटाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

अपने पोस्ट में कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने दिवंगत संविदा नर्सिंगकर्मी दीपक खारवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि दीपक खारवाल के आश्रित परिवार को सरकारी नौकरी और उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि परिवार को कठिन परिस्थितियों में सहारा मिल सके।

गौरतलब है कि संविदा नर्सिंगकर्मी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं और विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। बाड़मेर में भी आंदोलन लगातार जारी है, जिसके चलते यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष के समर्थन के बाद अब इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। वहीं आंदोलनरत नर्सिंगकर्मियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।

फिलहाल सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार आंदोलनरत नर्सिंगकर्मियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और आंदोलन का आगे क्या स्वरूप रहता है।