भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंची हैं। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, निवेश, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक के दौरान भारत और जापान के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन (MoC) पर भी हस्ताक्षर किए गए।

'छोटी बहन' कहकर किया स्वागत

संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सानाए ताकाइची का भारत की पहली आधिकारिक यात्रा पर स्वागत करते हुए उन्हें अपनी "छोटी बहन" बताया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भरोसे पर आधारित मजबूत मित्र भी हैं।

व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी

बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर भी जोर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत और जापान ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार का भुगतान सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में हो सके।

यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे स्थानीय मुद्रा में भुगतान कर सकेंगी। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत घटेगी और लेनदेन अधिक तेज एवं आसान होगा।

RBI और जापान के बीच होगा समझौता

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC) करने की तैयारी कर रहा है। यह पहल अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान जारी साझा विजन दस्तावेज का हिस्सा मानी जा रही है।

भारत में लगातार बढ़ रहा जापानी निवेश

भारत और जापान के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया।

जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। वर्तमान में भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र से जुड़ी है।

हाई-टेक और रक्षा सहयोग पर फोकस

दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, हाई-टेक डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सहमति जताई। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख उदाहरण माना गया। यह परियोजना जापान की शिनकानसेन तकनीक और वित्तीय सहयोग से विकसित की जा रही है।

16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा

प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार भारत आई हैं। अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने पर जोर रहेगा।