विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और डॉलर में नरमी के चलते भारतीय रुपया (Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। कारोबारी सत्र के दौरान रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 94.90 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले रुपया कमजोर स्तर पर कारोबार कर रहा था, लेकिन वैश्विक बाजारों में बेहतर माहौल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने घरेलू मुद्रा को मजबूती प्रदान की।
वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी ने रुपये को समर्थन दिया है। इसके अलावा एशियाई मुद्राओं में मजबूती का असर भी भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला।
रुपये की मजबूती का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जो कच्चा माल या अन्य वस्तुओं का आयात करती हैं, क्योंकि मजबूत रुपये से आयात की लागत कम होती है। वहीं विदेश यात्रा, विदेशी शिक्षा और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने वाले उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिल सकता है।
रुपये की आगे की चाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रहता है, तो रुपये में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।