भारत में ग्रीन मोबिलिटी और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। पेट्रोल में पहले ही E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) लागू होने के बाद अब सरकार और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां डीजल में भी बायोफ्यूल मिलाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इसी कड़ी में 5% इथेनॉल-ब्लेंडेड डीजल (E-Diesel) का परीक्षण शुरू किया गया है।
क्या है इथेनॉल-ब्लेंडेड डीजल?
इथेनॉल-ब्लेंडेड डीजल एक ऐसा ईंधन है जिसमें पारंपरिक डीजल के साथ एक निश्चित मात्रा में इथेनॉल मिलाया जाता है। भारत में फिलहाल 5% तक इथेनॉल मिश्रण के परीक्षण किए जा रहे हैं ताकि इसे व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल करने से पहले इसकी क्षमता, माइलेज और इंजन पर प्रभाव को परखा जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य है: जीवाश्म ईंधनों (fossil fuels) पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण उत्सर्जन घटाना, कृषि आधारित इथेनॉल उद्योग को बढ़ावा देना
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है। डीजल और पेट्रोल की भारी खपत देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती है। ऐसे में बायोफ्यूल्स को बढ़ावा देकर: आयात बिल कम किया जा सकता है, किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है
इंजन और तकनीक पर असर
इथेनॉल और डीजल का मिश्रण अभी परीक्षण चरण में है क्योंकि: अलग-अलग अनुपात इंजन की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकते हैं, फ्यूल एफिशिएंसी और माइलेज में बदलाव संभव है, पुराने डीजल इंजन के लिए अनुकूलता एक चुनौती हो सकती है, इसी कारण ऑटोमोबाइल कंपनियां और रिसर्च संस्थान मिलकर इस तकनीक को सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर काम कर रहे हैं।
आइसोब्यूटेनॉल: अगली पीढ़ी का बायोफ्यूल
इसके साथ ही भारत में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) जैसे एडवांस बायोफ्यूल्स पर भी रिसर्च तेज हो गई है। इसे भविष्य का संभावित ईंधन माना जा रहा है क्योंकि: इसकी ऊर्जा घनता (energy density) ज्यादा होती है, यह पेट्रोल और डीजल दोनों के साथ बेहतर तरीके से ब्लेंड हो सकता है, इंजन के लिए अधिक स्थिर और कुशल विकल्प माना जाता है
भविष्य की संभावनाएं
यदि ये परीक्षण सफल रहते हैं तो आने वाले वर्षों में भारत में: डीजल वाहनों में बायोफ्यूल मिश्रण आम हो सकता है, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता काफी कम हो सकती है, कृषि और ऊर्जा सेक्टर के बीच एक मजबूत इकोसिस्टम बन सकता है
निष्कर्ष
इथेनॉल-ब्लेंडेड डीजल और आइसोब्यूटेनॉल जैसे बायोफ्यूल्स भारत के ऊर्जा भविष्य को एक नई दिशा दे सकते हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में मदद करेंगे बल्कि देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से ले जाएंगे।