पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन से पहले राजस्थान की राजनीति में श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हालिया बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तीखा सियासी वार-पलटवार देखने को मिला।
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें रिफाइनरी के इतिहास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। वहीं, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
गहलोत ने साझा कीं 2013 की तस्वीरें
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने एक्स अकाउंट पर वर्ष 2013 की तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास 2013 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने किया था।
गहलोत ने लिखा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले भी रिफाइनरी में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर गलत बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को परियोजना का इतिहास ज्ञात नहीं है तो उन्हें सार्वजनिक बयान देने से पहले अधिकारियों से सही तथ्य और दस्तावेज मंगवाने चाहिए।
'भाजपा सरकार ने पांच साल तक परियोजना रोके रखी'
गहलोत ने आरोप लगाया कि 2013 में शिलान्यास के बाद केंद्र और तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को करीब पांच वर्षों तक ठंडे बस्ते में डाले रखा। उनका दावा है कि इसी देरी के कारण परियोजना की लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए एचपीसीएल के साथ संयुक्त उपक्रम (HRRL) बनाकर रिफाइनरी में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी ली, जिससे राज्य में इस परियोजना का रास्ता साफ हो सका।
मदन राठौड़ का पलटवार
गहलोत के आरोपों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि 2013 में चुनाव से ठीक पहले बिना बजट, बिना जमीन और बिना पर्यावरणीय मंजूरी के केवल शिलान्यास कर देना विकास नहीं, बल्कि राजनीतिक स्टंट था।
राठौड़ ने दावा किया कि 2014 में भाजपा सरकार ने एचपीसीएल के साथ समझौते की शर्तों पर दोबारा बातचीत कर राजस्थान के हजारों करोड़ रुपये बचाए। उन्होंने कहा कि जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना का वास्तविक कार्यारंभ कराया, जिसके बाद रिफाइनरी का निर्माण गति पकड़ सका।
कांग्रेस सरकार पर भी लगाए आरोप
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि जो लोग आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं, वही उस दौरान परियोजना को अटकाने और धीमा करने के लिए जिम्मेदार थे।
राठौड़ ने दावा किया कि वर्तमान डबल इंजन सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रिफाइनरी परियोजना को तेजी से पूरा कर रही है और यह जल्द ही राजस्थान के औद्योगिक विकास का नया आधार बनेगी।
रिफाइनरी पर श्रेय की राजनीति तेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पचपदरा रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित किए जाने से पहले इस परियोजना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच श्रेय लेने की राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है। दोनों दल अपने-अपने कार्यकाल को परियोजना की सफलता का आधार बताते हुए एक-दूसरे पर तथ्य छिपाने और जनता को गुमराह करने के आरोप लगा रहे हैं।