केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर पायरेटेड फिल्मों और OTT वेब सीरीज की अवैध शेयरिंग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 4 जुलाई को कंपनी को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद पायरेटेड कंटेंट उपलब्ध कराने वाले चैनलों, ग्रुप्स, बॉट्स और अकाउंट्स के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे तथा 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन रिपोर्ट सरकार को सौंपे।

यह तीन दिनों के भीतर टेलीग्राम को मिला दूसरा सरकारी नोटिस है। इससे पहले 2 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने टेलीग्राम के यूजरनेम फीचर को लेकर सुरक्षा और साइबर अपराध संबंधी चिंताओं पर जवाब मांगा था।

शिकायत का इंतजार नहीं, खुद रोकें पायरेसी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने टेलीग्राम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह केवल शिकायत मिलने का इंतजार न करे, बल्कि पायरेटेड फिल्मों और OTT कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने से रोकने के लिए मजबूत और सक्रिय मॉडरेशन सिस्टम विकसित करे।

सरकार का कहना है कि पायरेसी के मामलों में कंपनी का मौजूदा रवैया सूचना प्रौद्योगिकी नियमों की भावना के अनुरूप नहीं है। इसलिए बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनलों, ग्रुप्स, बॉट्स, अकाउंट्स, एडमिन और उनसे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

3000 से ज्यादा चैनलों पर पहले भी कार्रवाई

सरकार इससे पहले भी 3,000 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है, जो फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट सामग्री की अवैध शेयरिंग में शामिल पाए गए थे। अब सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी इस तरह का कंटेंट प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध मिलता है तो और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

जून में पेपर लीक मामले में भी घिरा था टेलीग्राम

टेलीग्राम हाल के महीनों में कई सरकारी जांचों के दायरे में रहा है। जून 2026 में पेपर लीक मामलों के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर सरकार ने 16 जून से 22 जून तक टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया था। इसके अलावा NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए कंपनी को 30 जून तक मैसेज-एडिटिंग फीचर बंद रखने का निर्देश भी दिया गया था, ताकि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी में छेड़छाड़ न हो सके।

यूजरनेम फीचर पर भी सरकार की नजर

2 जुलाई को जारी नोटिस में केंद्र सरकार ने टेलीग्राम से पूछा था कि उसका यूजरनेम फीचर ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराधों को किस तरह बढ़ावा दे सकता है तथा इन जोखिमों को रोकने के लिए कंपनी ने क्या सुरक्षा उपाय किए हैं। इसी तरह के सवाल व्हाट्सएप और सिग्नल को भी भेजे गए हैं।

लगातार मिल रहे सरकारी नोटिस यह संकेत देते हैं कि केंद्र सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पायरेसी, साइबर सुरक्षा और यूजर जवाबदेही को लेकर नियमों के पालन को और सख्ती से लागू करना चाहती है।