टोंक के चर्चित SDM थप्पड़ कांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। निर्दलीय नेता नरेश मीणा को एक बार फिर जेल जाना होगा। टोंक की SC-ST कोर्ट ने हाईकोर्ट से मिली उनकी सशर्त जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि नरेश मीणा ने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने के आदेश दिए गए हैं।

यह मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुए SDM थप्पड़ कांड से जुड़ा है। समरावता गांव के ग्रामीण अपने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर रहे थे। नरेश मीणा भी ग्रामीणों के समर्थन में धरने पर बैठे थे। आरोप है कि मतदान बहिष्कार के बावजूद तीन लोगों से जबरन वोट डलवाए गए, जिससे नाराज होकर नरेश मीणा ने मौके पर मौजूद SDM अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया।

घटना के बाद पुलिस ने नरेश मीणा को हिरासत में लिया था, लेकिन उनके समर्थकों ने उन्हें छुड़ा लिया। इसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों ने पथराव व आगजनी की। अगले दिन पुलिस ने नरेश मीणा को दोबारा गिरफ्तार किया और 15 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया था।

बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी। लेकिन हाल ही में झालावाड़ स्कूल हादसे में सात बच्चों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने और धरने में शामिल होने के दौरान पुलिस ने उनकी गतिविधियों को जमानत की शर्तों का उल्लंघन बताया। इसी आधार पर नगरफोर्ट थाना पुलिस ने SC-ST कोर्ट में जमानत रद्द करने की अर्जी लगाई थी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान SC-ST कोर्ट की जज आरती माहेश्वरी ने पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी। कोर्ट के फैसले के बाद अब उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया जाएगा।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेश मीणा ने कहा कि वे अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं और आदेश की प्रति मिलने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वे बीजेपी में शामिल हो गए होते तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि वे जनता के अधिकारों के लिए कानून के दायरे में रहकर संघर्ष कर रहे हैं और यही बात सत्ता पक्ष को स्वीकार नहीं है।

नरेश मीणा ने पुलिस पर कोर्ट को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों से मिलने जाना जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित परिवारों से मिलने को भी जमानत उल्लंघन माना जाएगा तो यह संविधान की भावना के विपरीत होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि SDM को थप्पड़ मारने की घटना गुस्से में हुई थी और इससे किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई थी, बावजूद इसके उनके खिलाफ जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। उनके अनुसार सरकार और पुलिस ने उन पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की और उन्हें लंबे समय तक जमानत नहीं मिलने दी।

अब SC-ST कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद नरेश मीणा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।