प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पचपदरा (बालोतरा) से वर्चुअल माध्यम से जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना का शिलान्यास किया। करीब 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 41 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर राजधानी जयपुर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को नई दिशा देगा। इस परियोजना के तहत कुल 36 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे और इसे लगभग साढ़े पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जयपुर के एसएमएस स्टेडियम के इनडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण किया गया। इस अवसर पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा, स्थानीय विधायक और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक मौजूद रहे।
प्रहलादपुरा से टोडी तक दौड़ेगी मेट्रो
जयपुर मेट्रो फेज-2 का प्रस्तावित कॉरिडोर प्रहलादपुरा से सीकर रोड स्थित टोडी तक विकसित किया जाएगा। परियोजना को पांच अलग-अलग जोन में बांटा गया है ताकि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
पहले चरण का काम शुरू, दूसरा होगा अंडरग्राउंड
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार पहले जोन में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल गोशाला तक करीब 12 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिस पर लगभग 918 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दूसरे जोन में पिंजरापोल गोशाला से जवाहर सर्किल एयरपोर्ट तक करीब 3 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस हिस्से में दो भूमिगत स्टेशन बनाए जाएंगे और इस पर लगभग 1160 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस खंड का टेंडर जारी हो चुका है, जिसे 22 जुलाई को खोला जाएगा। शेष तीन जोन के लिए भी जल्द वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे।
खासाकोठी बनेगा नया इंटरचेंज स्टेशन
परियोजना के तहत मेट्रो फेज-1 में भी अहम बदलाव किए गए हैं। बड़ी चौपड़ से मानसरोवर के बीच संचालित मौजूदा मेट्रो लाइन पर खासाकोठी में नया स्टेशन बनाया जाएगा। इसके बाद फेज-1 में स्टेशनों की संख्या 11 से बढ़कर 12 हो जाएगी।
यहीं पर फेज-2 का स्टेशन भी विकसित होगा और दोनों स्टेशनों को 150 मीटर लंबे फुट ओवरब्रिज से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन में आसानी से इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी।
15 साल बाद परियोजना को मिली नई गति
जयपुर मेट्रो फेज-2 की पहली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) वर्ष 2011 में तैयार की गई थी। पिछले 15 वर्षों में कांग्रेस और भाजपा सरकारों के दौरान इस परियोजना में कई बार संशोधन हुए। डेढ़ साल पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी, जिसके बाद अब इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।