नई दिल्ली —  Supreme Court of India ने National Council of Educational Research and Training की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले संदर्भ को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि “सिर्फ माफी मांग लेना या चैप्टर हटाना पर्याप्त नहीं है।”

दरअसल, विवादित किताब के अध्याय में न्यायपालिका के बारे में ‘भ्रष्टाचार’, बैकलॉग और जजों की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र था, जिसे कोर्ट ने अनुचित बताया। कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया और कहा कि किसी भी तरह से न्यायपालिका की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह कंटेंट न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और इसे “गहरे-से-सोचे-समझे प्रयास” के रूप में देखा गया है। कोर्ट ने कक्षा 8 की किताब पर पूर्ण बैन, सभी भौतिक तथा डिजिटल प्रतियों को जप्त करने और प्रधानमंत्री शिक्षा सचिव तथा एनसीईआरटी निदेशक को शो-कारण नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

एनसीईआरटी ने विवाद के बाद किताब को वेबसाइट से हटा दिया है और वितरण रोक दिया है, साथ ही माफी भी मांगी है, जिसे कोर्ट ने पर्याप्त नहीं माना है। कोर्ट ने कहा कि वह यह पता लगाएगा कि निर्णय के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं और आवश्यक कार्रवाई करेगा। अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित है।

पहले इस किताब में न्यायपालिका के वास्तविक कार्य, उसकी भूमिका और चुनौतियों को समझाने के लिए यह अध्याय जोड़ा गया था, लेकिन अब यह विवाद भारत के शैक्षणिक तथा संवैधानिक बहस का मुख्य मुद्दा बन गया है।