राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चंबल के बीहड़ों में कभी आतंक का दूसरा नाम रहे कुख्यात डाकू जगन गुर्जर की कहानी अब खत्म हो चुकी है। 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में उसकी हत्या कर दी गई। आरोप है कि उसी बैरक में बंद हार्डकोर कैदी विष्णु ने तौलिए से गला दबाकर उसकी जान ले ली।
जगन गुर्जर देश का शायद पहला ऐसा डाकू था, जिसके एनकाउंटर की मांग संसद में उठी थी। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने वर्ष 2019 में लोकसभा में कहा था कि जगन गुर्जर जैसे खूंखार डाकू के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और उसका एनकाउंटर किया जाना चाहिए।
मंदिर के पुजारी का बेटा कैसे बना डाकू
धौलपुर जिले के भवूतीपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर साधारण परिवार से था। उसके पिता शिवचरण गुर्जर स्थानीय बाबू महाराज मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे और दूध का कारोबार भी करते थे। साल 1994 में मंदिर कमेटी के विवाद के बाद जगन ने मारपीट की और पुलिस से बचने के लिए बीहड़ों में चला गया। यहीं से उसकी अपराध की दुनिया की शुरुआत हुई।
125 मुकदमे और तीन राज्यों में आतंक
जगन गुर्जर के खिलाफ 125 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हुए। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, अपहरण और अवैध हथियारों से जुड़े कई गंभीर अपराध शामिल थे। करीब एक दशक तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में उसका आतंक कायम रहा।
तीन बार किया सरेंडर, लेकिन नहीं बदला
एनकाउंटर के डर से जगन गुर्जर ने तीन बार आत्मसमर्पण किया। पहला सरेंडर 2001 में, दूसरा 2009 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में और तीसरा 2018 में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने किया। हालांकि हर बार जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर अपराध का रास्ता अपना लिया।
3 रुपए और पंचर को लेकर भी करता था विवाद
समय के साथ जगन का व्यवहार और हिंसक हो गया। वर्ष 2019 में उसने महज 3 रुपए के खुले पैसे मांगने पर दुकानदार से मारपीट कर दी। कुछ दिनों बाद गाड़ी का पंचर सही नहीं बनाने पर भी उसने पंचर बनाने वाले के साथ मारपीट की। इन घटनाओं ने दिखाया कि कभी बड़े अपराध करने वाला डाकू छोटी-छोटी बातों पर भी हिंसक हो जाता था।
धौलपुर महल उड़ाने की दी थी धमकी
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान जगन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देकर देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय पुलिस ने उस पर 12 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
सुरक्षा की मांग भी की थी
बाद के वर्षों में जगन गुर्जर ने अपनी जान को खतरा बताते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डीजीपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की थी। उसने दावा किया था कि जेल से बाहर आने के बाद कई लोग उसकी हत्या करना चाहते हैं।
अजमेर जेल में हुआ अंत
29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने तौलिए से गला घोंटकर उसकी हत्या की। दोनों एक ही बैरक में बंद थे। पुलिस और जेल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।