बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में दो प्रसूताओं की मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को मृतक महिलाओं के परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने न्याय की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी थाली और कटोरा लेकर पहुंचे तथा प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में मृतका शारदा नायक के पिता हीरालाल नायक, उनकी तीन वर्षीय बेटी बिंदिया और प्रीति नायक के पति कमल नायक भी शामिल रहे। परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उन्हें परिसर के बाहर ही रोक दिया।
कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर से कटोरा लेकर मिलने की मांग की, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद परिजन और कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर बैठ गए, नारेबाजी की और विरोध स्वरूप कटोरे वहीं छोड़कर लौट गए।
देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने कहा कि वे अस्पताल में दम तोड़ने वाली दोनों महिलाओं के लिए न्याय मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि न्याय मांगना राजनीति है, तो वे यह राजनीति करने को तैयार हैं। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, पीबीएम अस्पताल में भर्ती प्रसूता शारदा नायक की 21 जून को मौत हो गई थी। इससे पहले 18 जून को प्रीति नायक की भी मृत्यु हो चुकी थी। प्रीति के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि शारदा के परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर शव लेने से इनकार कर दिया है। इसी कारण तीन दिन बाद भी शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है।
मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और परिजनों ने पीबीएम अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक करीब दो किलोमीटर का मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर थे, जिन पर 'शारदा के न्याय के लिए जिला कलेक्टर भीख दो' जैसे संदेश लिखे हुए थे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि यदि वे कटोरा बाहर रख दें तो उन्हें कलेक्टर से मिलने दिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस नेता इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके चलते दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिले बिना ही वापस लौट गया।
इससे पहले सोमवार को संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा की मौजूदगी में प्रशासन, पुलिस, कांग्रेस नेताओं और शारदा के परिजनों के बीच वार्ता भी हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। परिजन अब भी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
वहीं जिला कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि ज्ञापन देने पर किसी तरह की रोक नहीं थी और परिजन एडीएम को भी ज्ञापन सौंप सकते थे। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासन और परिजनों के बीच गतिरोध बना हुआ है।