जयपुर: अगर आप गुलाबी नगरी की सड़कों पर रोज गाड़ियों के हॉर्न, बेतरतीब जाम और गायब हो चुके फुटपाथों से परेशान हैं, तो थोड़ा राहत की सांस लीजिए। जयपुर की रफ्तार और खूबसूरती को एक नया मोड़ मिलने जा रहा है। शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए 'ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड' की बैठक में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं।
JDA आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अगुवाई में बने इस मास्टर प्लान के तहत अब सड़कों से ना सिर्फ अवैध कब्जों का सफाया होगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नियम तोड़ने वालों की नींद भी उड़ने वाली है!
आइए आसान भाषा में जानते हैं कि जयपुर की सड़कों पर क्या-क्या बदलने जा रहा है:
फुटपाथ पर अब 'सिर्फ' पैदल राहगीरों का हक
दुकानों की सीढ़ियां, अवैध डेयरी बूथ और रैंप बनाकर जिन फुटपाथों पर कब्जा कर लिया गया था, उन पर अब जेडीए (JDA) का बुलडोजर चलेगा। जेडीए की प्रवर्तन शाखा एक विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करेगी। साफ संदेश दिया गया है— फुटपाथ का मतलब सिर्फ और सिर्फ पैदल यात्री!
बेसमेंट में दुकानें चलाईं तो सील होंगे मॉल और अस्पताल
अक्सर देखा जाता है कि शहर के बड़े मॉल्स, अस्पताल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बेसमेंट पार्किंग की जगह दुकानें या गोदाम खोल लेते हैं। इस वजह से गाड़ियां सड़कों पर पार्क होती हैं और जाम लगता है।
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एसएल मार्ग (SL Marg) समेत शहर के सभी प्रमुख परिसरों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
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बेसमेंट का अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल बंद कराकर उसे फिर से सिर्फ पार्किंग के लिए आरक्षित किया जाएगा।
50 हजार ई-रिक्शा के लिए बने 7 जोन, सुरक्षा के लिए SOS बटन
जयपुर के जाम की सबसे बड़ी वजह बन चुके लगभग 50,000 ई-रिक्शा पर अब नकेल कसने की तैयारी है:
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पूरे शहर को 7 जोनों में बांटा गया है।
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हर ई-रिक्शा पर QR कोड लगेगा, जिससे चालक की पूरी जानकारी मिलेगी।
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महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए इनमें SOS अलर्ट (इमर्जेंसी बटन) की सुविधा दी जाएगी।
फ्लाईओवर के नीचे बनेगी खूबसूरत 'हेरिटेज पार्किंग'
शहर के फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जगहों पर अब गंदगी या असामाजिक तत्वों का डेरा नहीं होगा। इन जगहों को हेरिटेज थीम पर सजाया जाएगा, पौधे लगाए जाएंगे, बेहतर लाइटिंग होगी और इन्हें व्यवस्थित पार्किंग में तब्दील किया जाएगा।
AI तकनीक से कटेगा चालान, चौराहों पर दिखेगी 'नाम पट्टी'
नियम तोड़ने वालों पर सीधी नज़र रखने के लिए ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक यानी AI कैमरे लगाए जा रहे हैं।
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शहर के प्रमुख चौराहों पर LED स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिन पर गाड़ियों के बकाया चालान (Pending Challans) सीधे डिस्प्ले होंगे।
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ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए वॉशरूम और सभी सुविधाओं से लैस हेरिटेज डिजाइन वाले नए पुलिस बूथ भी बनाए जाएंगे।
कागज पर बना यह मास्टर प्लान जयपुर की सूरत बदलने के लिए बेहद शानदार नजर आ रहा है। लेकिन असली 'सस्पेंस' इस बात पर आकर टिका है कि— क्या सालों से सड़कों पर काबिज अतिक्रमण माफिया और ट्रैफिक नियमों को ठेंगा दिखाने वाले लोग इस नई व्यवस्था के आगे घुटने टेकेंगे?
प्रशासन ने तो पूरी तैयारी कर ली है और AI कैमरे भी तैनात हो रहे हैं... लेकिन क्या आप चौराहों की बड़ी LED स्क्रीन पर अपनी गाड़ी का पेंडिंग चालान देखने के लिए तैयार हैं, या अब खुद ही नियम से चलना शुरू करेंगे? क्योंकि इस बार सिर्फ पुलिस की नज़र नहीं... AI की तीसरी आँख भी आप पर टिकी है!