जयपुर। बदलते दौर के साथ अब राजस्थान पुलिस भी खुद को हाई-टेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अपराधियों तक पहुंचने के लिए अब सिर्फ गवाहों और पारंपरिक जांच पर निर्भर नहीं रहना होगा। पुलिस अब डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपराधों की जांच करेगी। इसके लिए पहली बार विभाग में 5 टेक्निकल एक्सपर्ट्स की लेटरल एंट्री की जाएगी।
राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा ने एक साल के संविदा आधार पर इन विशेषज्ञों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य पुलिस जांच को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और डिजिटल अपराधों पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाना है।
पहली बार होगी लेटरल एंट्री
अब तक पुलिस विभाग में नियमित भर्ती के जरिए ही नियुक्तियां होती रही हैं, लेकिन इस बार तकनीकी विशेषज्ञों को सीधे संविदा पर नियुक्त किया जाएगा। ये विशेषज्ञ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर अपराधों की जांच में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेंगे।
क्या होगा इन विशेषज्ञों का काम?
क्राइम डेटा एनालिस्ट
क्राइम डेटा एनालिस्ट पुराने और नए अपराधों का विश्लेषण करेगा। किस इलाके में अपराध की संभावना अधिक है, कौन-से अपराध बार-बार हो रहे हैं और उनका पैटर्न क्या है, इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इससे पुलिस अपराध होने से पहले ही रणनीति बना सकेगी।
AI स्पेशलिस्ट
AI विशेषज्ञ पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाएंगे। फेशियल रिकग्निशन, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और साइबर फ्रॉड के पैटर्न का विश्लेषण AI तकनीक के जरिए किया जाएगा।
नए कानूनों के क्रियान्वयन की निगरानी
विशेषज्ञ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) में डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहयोग करेंगे।
रोड सेफ्टी और ड्रग कंट्रोल
सड़क हादसों वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, दुर्घटनाओं के डेटा का विश्लेषण और ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क का अध्ययन कर नई रणनीतियां तैयार की जाएंगी।
कैसे होगा चयन?
अतिरिक्त महानिदेशक बिपिन कुमार पांडे के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को 45 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। सभी नियुक्तियां एक वर्ष के संविदा आधार पर होंगी।
चयन प्रक्रिया में सबसे पहले आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी होगी। इसके बाद लिखित परीक्षा, प्रैक्टिकल टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। विज्ञापन जारी होने के 15 दिनों के भीतर पुलिस मुख्यालय में आवेदन जमा करना होगा।
क्यों अहम है यह पहल?
साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फाइनेंशियल क्राइम और संगठित अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए राजस्थान पुलिस तकनीक का सहारा ले रही है। माना जा रहा है कि AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट को तेजी से ट्रैक किया जा सकेगा और जांच पहले से ज्यादा सटीक होगी।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो राजस्थान पुलिस की जांच प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है और पुलिसिंग का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।