राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध से करीब 20 साल बाद पानी छोड़ा गया, जिससे हजारों किसानों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। राज्य सरकार की निगरानी में सोमवार को बांध के तीन गेट खोले गए और गंभीरी नदी, नहरों तथा गुड़ला-पांचना लिफ्ट सिंचाई योजना में जल प्रवाह शुरू किया गया। इसे करौली के किसानों के लिए ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है।

जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री सुरेश रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की मौजूदगी में जल प्रवाह का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे।

तकनीकी खराबी बनी चुनौती

बांध से पानी छोड़ने के दौरान एक गेट की रॉड जाम हो गई, जिससे नहरों में पानी की आपूर्ति निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग, एसडीआरएफ और विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंची। पूरी रात चले मरम्मत अभियान के बाद मंगलवार तड़के करीब 4:50 बजे गेट सफलतापूर्वक खोल दिया गया और नहरों में पानी का प्रवाह शुरू हो गया।

पानी नहीं पहुंचा तो किसानों का प्रदर्शन

जल आपूर्ति में देरी से नाराज किसानों और ग्रामीणों ने श्रीमहावीरजी क्षेत्र के कोड़िया की बगीची, किरवाड़ा, कैमला मोड़, कुसाय, गाधौली, कटकड़, मांच और रुंडी समेत कई स्थानों पर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। हालात को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूरी रात बांध पर मौजूद रहे तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

61 करोड़ रुपये की नई सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास

पांचना बांध से पानी छोड़े जाने के साथ ही सरकार ने दो नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और गुड़ला लिफ्ट परियोजना के पीडीएन सिस्टम की रीमॉडलिंग का शिलान्यास भी किया। इन विकास कार्यों पर करीब 61 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

20 साल पुराने विवाद का समाधान

पांचना बांध से पानी की निकासी को लेकर पिछले दो दशकों से कैचमेंट और कमांड एरिया के किसानों के बीच विवाद बना हुआ था। 30 जून को जयपुर में सरकार के मंत्रियों और दोनों पक्षों के किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद सहमति बनी, जिसके आधार पर बांध से पानी छोड़ने का फैसला लिया गया।

हजारों किसानों को मिलेगा लाभ

करौली जिले में गंभीरी नदी पर स्थित पांचना बांध एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध माना जाता है। इससे करौली और आसपास के कमांड क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से जल संकट झेल रहे किसानों के लिए यह फैसला बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे कृषि उत्पादन बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।