राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा प्रकरण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग करते हुए मौजूदा राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट गठित करने का सुझाव दिया है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नए ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाने की बात भी कही।

दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है क्योंकि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है।

'योगी खुद बनें नए ट्रस्ट के अध्यक्ष'

अशोक गहलोत ने कहा कि मौजूदा ट्रस्ट की जगह नया ट्रस्ट बनाया जाए और उसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करें। उन्होंने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में केवल एक विचारधारा के लोगों को नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों और विचारधाराओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि पहले कथित चढ़ावा मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच पूरी होनी चाहिए, उसके बाद नए ट्रस्ट का गठन किया जाए।

'ट्रस्ट में केवल आरएसएस-बीजेपी के लोग नहीं होने चाहिए'

गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान ट्रस्ट में केवल आरएसएस और बीजेपी से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है, जबकि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पहले की तरह विविध विचारधाराओं वाले लोगों का ट्रस्ट होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

बंशी पहाड़पुर के पत्थरों का भी किया जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब भरतपुर के बंशी पहाड़पुर से अवैध खनन कर पत्थर ले जाए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय राम मंदिर निर्माण समिति से जुड़े चंपत राय उनसे मिलने आए थे।

गहलोत के अनुसार, उन्होंने चंपत राय से कहा था कि राम मंदिर जैसा पवित्र कार्य अवैध खनन के पत्थरों से नहीं होना चाहिए और केवल वैध खनन से प्राप्त पत्थरों का ही उपयोग किया जाए।

'पीएमओ से संपर्क के बाद हुआ समाधान'

गहलोत ने कहा कि बाद में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र उनके संपर्क में आए। उन्होंने बताया कि बंशी पहाड़पुर क्षेत्र वन क्षेत्र में होने के कारण वैध खनन में दिक्कत थी। राज्य सरकार ने प्रक्रिया पूरी कर उस क्षेत्र को वन क्षेत्र से बाहर कराने की सिफारिश की, जिससे वैध खनन का रास्ता साफ हुआ और मंदिर निर्माण के लिए कानूनी रूप से पत्थरों की आपूर्ति संभव हो सकी।

'आस्था पर चोट पहुंची है'

अशोक गहलोत ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा प्रकरण से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि देशभर के लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।