भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत तामलोर के युवा सरपंच एवं बाड़मेर जिला सरपंच संघ अध्यक्ष हिंदूसिंह तामलोर ने राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े से शिष्टाचार मुलाकात कर सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने तामलोर और आसपास के सीमांत गांवों की समस्याओं, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक विस्तृत मांग पत्र राज्यपाल को सौंपा।

मुलाकात के दौरान हिंदूसिंह तामलोर ने कहा कि सीमा से जुड़े गांव केवल देश की अंतिम बसाहट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली पंक्ति हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं का विस्तार राष्ट्रीय प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना को तामलोर और आसपास के सीमावर्ती गांवों में अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और सीमावर्ती इलाकों से पलायन पर भी रोक लगेगी। उनका कहना था कि रोजगार और आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से लोग अपने गांवों में रहकर सीमा क्षेत्र को आबाद और सुरक्षित बनाए रख सकेंगे।

हिंदूसिंह तामलोर ने मांग पत्र में तामलोर रेलवे स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की भी मांग उठाई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में क्षेत्र के लोगों को अन्य स्टेशनों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे विद्यार्थियों, व्यापारियों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी होती है। ट्रेनों का ठहराव शुरू होने से आवागमन आसान होगा और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में क्षेत्र की बिजली व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उन्होंने तामलोर में 33/11 केवी ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) स्थापित करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिलेगी और घरेलू उपभोक्ताओं को भी बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

हिंदूसिंह तामलोर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल स्थानीय आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से विशेष योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े जनहित के मुद्दों को संबंधित विभागों, जिनमें रेल मंत्रालय, विद्युत विभाग और गृह मंत्रालय शामिल हैं, के समक्ष आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी, ताकि वहां के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

यह मुलाकात सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, ग्रामीण आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और लंबे समय से लंबित मांगों को शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।