जनसरोकार की खबरें गांव-ढाणी से राजधानी तक

  • Home
  • राजस्थान
  • राजनीति
  • क्राइम
  • भारत
  • बॉलीवुड
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
  • अंतर्राष्ट्रीय
भारत

पति की 9 हजार कमाई पर 12 हजार एलिमनी की मांग, सुप्रीम कोर्ट सख्त—‘जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते’

Web Desk 6 months ago
तलाक मामले में पति ने 9 हजार रुपये मासिक आय का हवाला देकर 12 हजार रुपये मेंटेनेंस देने में असमर्थता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी के गुजारे की जिम्मेदारी पति की है और जरूरत पड़े तो उधार लेकर भी भुगतान करना होगा। फैसला फिलहाल सुरक्षित रखा गया है।
Share

नई दिल्ली: गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) को लेकर एक अहम मामले में Supreme Court of India ने सख्त टिप्पणी की है। तलाक से जुड़े इस केस में पति ने दावा किया कि उसकी मासिक आय मात्र 9 हजार रुपये है, इसलिए वह अपनी पत्नी को 12 हजार रुपये प्रतिमाह एलिमनी नहीं दे सकता।

क्या है पूरा मामला?

सुनवाई के दौरान पति ने अदालत को बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर है और रोज करीब 325 रुपये कमाता है। उसका कहना था कि अधिक मेहनत करने पर भी उसकी मासिक आय मुश्किल से 9 हजार रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में 12 हजार रुपये मासिक मेंटेनेंस देना उसके लिए संभव नहीं है।

मामले की सुनवाई जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की बेंच ने की। बेंच ने पति के दावे पर संदेह जताते हुए कहा कि मौजूदा समय में इतनी कम आय का दावा भरोसेमंद नहीं लगता। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी कंपनी द्वारा न्यूनतम दैनिक वेतन से कम भुगतान करना स्वीकार्य नहीं है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

बेंच ने स्पष्ट किया कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की है। यदि वह मेंटेनेंस देने में असमर्थता जताता है, तो उसे पत्नी को अपने साथ रखने और उसके गुजारे का इंतजाम करने पर विचार करना चाहिए।
जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता और यदि जरूरत पड़े तो पति को उधार लेकर या अन्य साधनों से भुगतान सुनिश्चित करना होगा।

पत्नी की मांग

निचली अदालत ने पहले 6 लाख रुपये एकमुश्त देकर तलाक की अनुमति दी थी। लेकिन पत्नी इस राशि से संतुष्ट नहीं थी और उसने उच्च न्यायालय के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
पत्नी ने अदालत के सामने दो विकल्प रखे—

  • जीवनभर 12 हजार रुपये प्रतिमाह मेंटेनेंस, जिसमें हर साल निश्चित बढ़ोतरी हो

  • एकमुश्त 30 लाख रुपये का भुगतान।

फैसला सुरक्षित

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला भरण-पोषण और वैवाहिक जिम्मेदारियों को लेकर भविष्य में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

Advertisement

Stay Updated!

Get the latest breaking news directly on your phone.

  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • Youtube
View Comments & Full Story

Related Posts

पिता बनने की चाहत में जांच कराने पहुंचा था 26 साल का युवक, प...

12 hours ago

Old Monk पीने वाले तुरंत पढ़ें यह खबर: बॉम्बे हाई कोर्ट में ...

6 days ago

मिग-21 से पाक के छक्के छुड़ाने वाले अभिनंदन वर्धमान का बड़ा फै...

9 days ago

बाबा के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी! 15 सितंबर से फिर उड़ेंगे...

11 days ago
Advertisement

Latest Posts

पिता बनने की चाहत में जांच कराने पहुंचा था 26 साल ...

12 hours ago

"मेरे साथ धोखा हुआ..." जापान रवानगी से पहले रो पड़...

15 hours ago

50 फीट पीछे चल रहे थे साथी, आगे आई बेकाबू बोलेरो न...

1 day ago

पत्नी और तीन बेटियों का पत्थर से कुचला सिर, सुबह प...

1 day ago

वोट के लिए ईंट से फोड़ा सिर, निर्दलीय प्रत्याशी पर...

1 day ago

करोड़ों की फसलें स्वाहा होने की कगार पर, भगवान और ...

2 days ago

Copyright © 2026 the khatak - All Rights Reserved

Go to Homepage