भीलवाड़ा शहर में लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए राहतभरी खबर है। गायत्री आश्रम से रामधाम तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना अब धरातल पर उतरती नजर आने लगी है। बजट घोषणा 2026-27 के तहत प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए केंद्रीय एजेंसी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड (EPIL), नई दिल्ली ने काम शुरू कर दिया है।
करीब 303.48 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के तहत 2.490 किलोमीटर लंबा और चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। परियोजना के लिए 18 फरवरी 2026 को एलओए जारी किया गया था, जबकि 15 अप्रैल 2026 को आधिकारिक अनुबंध हुआ। डीपीआर तैयार करने पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
मार्च 2025 में शहर के प्रमुख और व्यस्ततम चौराहों पर किए गए ट्रैफिक सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे। गंगापुर चौराहे पर प्रतिदिन 82,484 वाहन, वीर तेजाजी सर्किल पर 76,576 वाहन और अजमेर चौराहे पर 66,060 वाहन दर्ज किए गए। सर्वे में पाया गया कि शहर का 50 प्रतिशत से अधिक ट्रैफिक इसी मुख्य कॉरिडोर से गुजरता है, जिसके चलते यहां ग्रेड सेपरेटेड एलिवेटेड कॉरिडोर को सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान माना गया।
परियोजना की योजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है। ट्रैफिक प्रोजेक्शन के अनुसार वर्ष 2029, 2030 और 2032 तक इन प्रमुख जंक्शनों पर वाहनों की संख्या एक लाख प्रतिदिन से अधिक पहुंच सकती है। ऐसे में यह एलिवेटेड रोड आने वाले वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हालांकि इस परियोजना को पूरा होने में अभी समय लगेगा। डीपीआर निर्माण, सरकारी स्वीकृतियां, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य सहित पूरी परियोजना को धरातल पर उतरने में करीब साढ़े तीन साल का समय लग सकता है। लेकिन इसके पूरा होने के बाद शहरवासियों को जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
शुक्रवार को कंपनी के महाप्रबंधक राकेश कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने प्रस्तावित रूट का निरीक्षण किया। टीम ने नगर विकास न्यास के अधिकारियों से तकनीकी जानकारी लेने के बाद सांसद दामोदर अग्रवाल से भी मुलाकात की। सांसद ने परियोजना में आमजन की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
ईपीआईएल के महाप्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि विस्तृत सर्वे का कार्य इसी माह शुरू कर दिया जाएगा और अगले चार माह में डीपीआर तैयार कर ली जाएगी। इसके बाद परियोजना को स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।