ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेजी से डिजिटल और सॉफ्टवेयर-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है। अब कार निर्माता कंपनियां केवल वाहन बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई कमाई के लिए सब्सक्रिप्शन-आधारित फीचर्स का मॉडल भी अपना रही हैं। इस मॉडल में कार में कई प्रीमियम हार्डवेयर फीचर्स पहले से मौजूद होते हैं, लेकिन उनका उपयोग करने के लिए ग्राहकों को मासिक या वार्षिक सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है।
क्या हैं सब्सक्रिप्शन-आधारित फीचर्स?
नई पीढ़ी की कारों में सीट हीटर, वेंटिलेटेड सीट्स, एडवांस ड्राइविंग मोड, अतिरिक्त हॉर्सपावर, प्रीमियम इंफोटेनमेंट, नेविगेशन, रिमोट स्टार्ट और अन्य स्मार्ट सुविधाएं पहले से इंस्टॉल रहती हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब ग्राहक संबंधित फीचर का सब्सक्रिप्शन खरीदता है।
कंपनियों को क्या होगा फायदा?
इस मॉडल से ऑटो कंपनियों को वाहन बेचने के बाद भी लगातार आय (Recurring Revenue) मिलती रहती है। साथ ही ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार केवल वही फीचर्स सक्रिय करा सकते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता है।
ग्राहकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
कुछ उपभोक्ता इस मॉडल को सुविधाजनक मानते हैं क्योंकि उन्हें सभी फीचर्स के लिए एक साथ बड़ी रकम नहीं चुकानी पड़ती। वहीं कई ग्राहकों का कहना है कि जब हार्डवेयर पहले से कार में मौजूद है, तो उसे इस्तेमाल करने के लिए अलग से शुल्क लेना उचित नहीं है।
भविष्य में और बढ़ेगा चलन
सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV) और ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट के बढ़ते उपयोग के साथ सब्सक्रिप्शन-आधारित फीचर्स का चलन और तेज होगा। आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक ऑटोमोबाइल कंपनियां इस बिजनेस मॉडल को अपनाकर नई डिजिटल सेवाएं पेश कर सकती हैं।
निष्कर्ष
सब्सक्रिप्शन-आधारित फीचर्स ऑटोमोबाइल उद्योग के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव लेकर आए हैं। इससे कंपनियों को दीर्घकालिक आय का नया स्रोत मिल रहा है, जबकि ग्राहकों को अपनी जरूरत के अनुसार फीचर्स चुनने की सुविधा मिल रही है। हालांकि, इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्राहक इसके अतिरिक्त खर्च को कितनी आसानी से स्वीकार करते हैं।