सरकारी स्कूल में मासूम छात्राओं के हाथों में थमाई झाड़ू, शिक्षिका ने दिया 'श्रमदान' का हवाला
राजस्थान के कोटा में एक सरकारी स्कूल की छात्राओं से झाड़ू लगवाने का वीडियो सामने आया है। सफाईकर्मी न होने के कारण टीचर ने इसे नियमित 'श्रमदान' बताया है। जानिए क्या है पूरा मामला।



राजस्थान के कोटा शहर से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां के गोविंद नगर स्थित राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालय में पढ़ने वाली छोटी बच्चियों के हाथों में किताब-कलम की जगह झाड़ू थमा दी गई। स्थानीय लोगों ने जब बच्चियों को स्कूल के बरामदे में झाड़ू लगाते देखा, तो उसका वीडियो बना लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
वीडियो बनते देख घबराईं छात्राएं
सामने आए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि दो मासूम छात्राएं स्कूल परिसर में सफाई कर रही हैं। हालांकि, जैसे ही बच्चियों की नजर वीडियो बना रहे स्थानीय लोगों पर पड़ी, उन्होंने तुरंत झाड़ू लगाना बंद कर दिया और दौड़कर अंदर मौजूद शिक्षिका (मैडम) को इसकी सूचना दी।
पोषाहार की जूठी थालियां उठाते दिखे छात्र
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जब स्कूल के हालात का जायजा लिया गया, तो स्थिति और भी चिंताजनक मिली। वहां कुछ छात्र मिड-डे मील (पोषाहार) खाने के बाद बाहर रखी जूठी थालियां समेटते नजर आए। जब बच्चों से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने झिझकते हुए कहा कि वे वहां केवल पानी पीने आए थे।
शिक्षिका की सफाई: 'हम सब मिलकर करते हैं श्रमदान'
इस पूरे विवाद पर स्कूल की शिक्षिका सुमन का कहना है कि विद्यालय में कोई नियमित सफाई कर्मचारी नियुक्त नहीं है। इसलिए, हर सोमवार को स्कूल में 'श्रमदान' किया जाता है। शिक्षिका ने तर्क दिया कि जिस समय बच्चे बाहर झाड़ू लगा रहे थे, उस वक्त शिक्षिकाएं अंदर सफाई कर रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में क्षेत्रीय पार्षद और विधायक भी विद्यालय में आकर श्रमदान कर चुके हैं।
एक टीचर के भरोसे 77 बच्चों का भविष्य
सफाई के अलावा स्कूल में स्टाफ की भारी कमी भी उजागर हुई है। कक्षा 1 से 5 तक चलने वाले इस प्राथमिक विद्यालय में कुल 77 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए मात्र दो महिला शिक्षिकाएं तैनात हैं। समस्या यह है कि इनमें से भी एक टीचर की ड्यूटी फिलहाल बीएलओ (BLO) कार्य में लगा दी गई है। ऐसे में पूरे स्कूल के सभी पांचों क्लास के बच्चों को पढ़ाने और संभालने का पूरा जिम्मा केवल एक ही शिक्षिका के कंधों पर है।
इस घटना के बाद से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, स्कूलों में सफाई व्यवस्था और मासूम बच्चों से मजदूरी करवाने जैसे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब इस मामले में क्या कदम उठाता है, यह देखना बाकी है।













































