सरपंचों के लिए चुनाव आयोग का सख्त फरमान, पर्चा भरने से पहले नहीं किया ये काम तो खारिज होगा नामांकन

राजस्थान में आगामी ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने गाइडलाइन जारी की है। चुनाव लड़ने के इच्छुक निवर्तमान सरपंचों (प्रशासकों) को नामांकन से पहले अपने पद से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनका नामांकन खारिज कर दिया जाएगा।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
October 1, 2026 • 3:00 AM  3
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सरपंचों के लिए चुनाव आयोग का सख्त फरमान, पर्चा भरने से पहले नहीं किया ये काम तो खारिज होगा नामांकन
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सरपंचों के लिए चुनाव आयोग का सख्त फरमान, पर्चा भरने से पहले नहीं किया ये काम तो खारिज होगा नामांकन

राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों (Panchayat Election) को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे निवर्तमान सरपंचों के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) की नई गाइडलाइन के अनुसार, वर्तमान में ग्राम पंचायतों में प्रशासक (Prashasak) का पद संभाल रहे लोगों को सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए अपनी कुर्सी छोड़नी होगी।

अगर कोई भी प्रशासक नामांकन दाखिल करने से पहले अपने पद से विधिवत इस्तीफा नहीं देता है, तो वह चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो जाएगा।

'लाभ का पद' माना गया है प्रशासक का पद

राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रशासक के पद को 'लाभ का पद' (Office of Profit) की श्रेणी में रखा है। आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरते समय ही उम्मीदवार का इस्तीफा मंजूर होना चाहिए। जब नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी, तब इस्तीफे की कॉपी अनिवार्य रूप से देखी जाएगी। यदि जांच के दौरान यह पाया गया कि उम्मीदवार का इस्तीफा सरकार या संबंधित अधिकारी द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है, तो उसका नामांकन तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया जाएगा।

इसलिए, चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रशासकों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते अपने इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी कर लें।

10 हजार से अधिक पंचायतों में लगे हैं प्रशासक

गौरतलब है कि राजस्थान में 10 हजार 290 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने गांवों में विकास कार्यों को सुचारू रखने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की थी। खास बात यह रही कि सरकार ने इन ग्राम पंचायतों के निवर्तमान सरपंचों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब चूंकि आगामी दिनों में जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत के चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में इन्हीं प्रशासकों के सामने चुनाव लड़ने के लिए पद छोड़ने की अनिवार्यता खड़ी हो गई है।

सरकार सभी प्रशासकों को एक साथ हटा सकती है

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के स्तर पर भी इस मामले में गंभीरता से मंथन चल रहा है। सरकार इस विचार में है कि चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक रूप से चुनावों की घोषणा होने से ठीक पहले ही सभी प्रशासकों को एकमुश्त हटा दिया जाए।

इस कदम से सभी निवर्तमान सरपंच बिना किसी तकनीकी बाधा के चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हो जाएंगे। हालांकि, अगर सरकार सामूहिक रूप से प्रशासकों को नहीं हटाती है, तो चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को अपना इस्तीफा संबंधित जिला कलेक्टर (District Collector) को सौंपना होगा। कलेक्टर अपने स्तर पर इस्तीफे को स्वीकार कर पदमुक्त करने के आदेश जारी कर सकते हैं।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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