राजस्थान में आगामी पंचायतीराज और नगर निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक संपन्न करा लिए जाएं। इसके साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी चुनावों को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पिछले शहरी निकाय चुनावों में मतदाता सूचियों में आई विसंगतियों से सबक लेते हुए, आयोग ने पंचायतीराज चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन (अपडेट) का निर्णय लिया है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज संस्थाओं की निर्वाचक नामावलियों के निरंतर अद्यतन के दौरान मतदाताओं के नाम जुड़वाने के संबंध में 14 सितंबर 2026 को निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार, अब मतदाता सूचियों में नाम जुड़वाने, हटाने या संशोधन करवाने की प्रक्रिया एक सतत प्रक्रिया होगी।
इससे पहले, मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण चुनाव से कुछ समय पहले ही किया जाता था, जिससे कई योग्य मतदाता छूट जाते थे या त्रुटियां रह जाती थीं। नई व्यवस्था से मतदाता किसी भी समय अपना नाम जुड़वाने या संशोधन करवाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
ऑनलाइन सुविधा से मिलेगी राहत
मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। मतदाता अब राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट (www.sec.rajasthan.gov.in) पर जाकर 'Online Claim & Objection' विकल्प के माध्यम से नाम जुड़वाने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
मतदाता सूची कैसे चेक करें?
मतदाता यह भी चेक कर सकते हैं कि उनका नाम मतदाता सूची में है या नहीं। इसके लिए उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जाना होगा और 'Electoral Roll / Voter List' विकल्प चुनना होगा। इसके बाद उन्हें अपना जिला, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत चुनना होगा। इसके बाद उनके सामने मतदाता सूची खुल जाएगी, जिसमें वे अपना नाम और अन्य जानकारी देख सकते हैं।
बूथों पर मतदाताओं की संख्या तय
आयोग ने मतदान केंद्रों (बूथों) पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या भी तय कर दी है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक मतदान बूथ पर सामान्यतः 1100 से अधिक मतदाता नहीं होंगे। इससे मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी और मतदाताओं को लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
मतदाता सूचियों का निरंतर अद्यतन एक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे और चुनाव परिणाम सही मायनों में जनभावना को प्रतिबिंबित करें। शहरी निकाय चुनावों में मिली शिकायतों के बाद, आयोग का यह कदम स्वागत योग्य है और यह उम्मीद की जाती है कि आगामी पंचायतीराज और नगर निकाय चुनाव अधिक सुचारू और त्रुटिरहित होंगे।