जवान के उतरवाए कपड़े, बनाया गंदा वीडियो: 'गे-डेटिंग ऐप' के जरिए हनीट्रैप
राजस्थान के अजमेर में गे-डेटिंग ऐप के जरिए ब्लैकमेल करने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश। गैंग ने CRPF जवान को बंधक बनाकर कपड़े उतरवाए और 89 हजार रुपये लूट लिए। पुलिस ने ऐप पर फेक प्रोफाइल बनाकर मास्टरमाइंड सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।



राजस्थान में साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग के रोज नए और खौफनाक तरीके सामने आ रहे हैं। ताजा मामला अजमेर जिले का है, जहां कृष्णगंज थाना पुलिस ने 'गे (Gay) डेटिंग ऐप' के जरिए लोगों को अपने हुस्न और हमदर्दी के जाल में फंसाकर लूटने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गैंग ने एक CRPF जवान को निशाना बनाते हुए उसे बंधक बनाया, कपड़े उतरवाए और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 89,000 रुपये लूट लिए।
इस पूरे मामले में पुलिस ने जाल बिछाकर मास्टरमाइंड 19 वर्षीय जयराम चौधरी समेत राहुल उर्फ रॉकी यादव, राकेश गोदारा (23) और दयाराम ढाका को गिरफ्तार कर लिया है। ये सभी आरोपी लग्जरी लाइफस्टाइल, ब्रांडेड कपड़ों, पार्टियों और 'ऑनलाइन एविएटर गेम' के शौक को पूरा करने के लिए इस तरह की वारदातों को अंजाम देते थे।
मदद का बहाना कर अस्पताल बुलाया, फिर कार में किया अगवा
यह वारदात 25 सितंबर की रात की है। आरोपियों ने गे-डेटिंग ऐप के जरिए पीड़ित से संपर्क किया। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि शिकार होने वाला व्यक्ति CRPF का जवान है। गिरोह के मास्टरमाइंड जयराम ने खुद को बीमार बताया और मदद मांगने के बहाने जवान को अजमेर के जनाना अस्पताल के पास बुलाया। जैसे ही जवान वहां पहुंचा, उसे सफेद रंग की स्विफ्ट कार में बैठा लिया गया, जहां पहले से ही उसके तीन अन्य साथी मौजूद थे।
खौफनाक 2 घंटे: कपड़े उतरवाए और अश्लील वीडियो की दी धमकी
आरोपी जवान को एक सुनसान इलाके में ले गए। वहां करीब दो घंटे तक उसे बंधक बनाकर रखा गया और बेरहमी से मारपीट की गई। दहशत का माहौल पैदा करने के लिए आरोपियों ने पीड़ित के कपड़े उतरवा दिए और मोबाइल की टॉर्च जलाकर अश्लील वीडियो बनाने का दिखावा किया। उन्होंने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए, तो वे यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे और उसके परिवार वालों को भी भेज देंगे। बदनामी के डर से जवान ने आरोपियों के खाते में ऑनलाइन 89,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
सबूत मिटाने में थे माहिर, पुलिस ने खुद बिछाया डिजिटल जाल
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बहुत ही शातिर तरीके से पीड़ित और अपने मोबाइल से डेटिंग ऐप और सारी चैट हिस्ट्री डिलीट कर देते थे ताकि पुलिस को कोई डिजिटल सबूत न मिल सके। जब पुलिस के लिए सुराग जुटाना मुश्किल होने लगा, तो कृष्णगंज थाना प्रभारी अरविंद चारण ने एक अनोखी और स्मार्ट रणनीति अपनाई।
पुलिस टीम ने खुद उस गे-डेटिंग ऐप पर एक फर्जी (Fake) प्रोफाइल बनाई और संदिग्धों से बातचीत शुरू की। इसी बातचीत, तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस 28 सितंबर को इन चारों आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही।
जयपुर से अजमेर तक फैला है गैंग का नेटवर्क
पुलिस जांच में एक बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस गिरोह का 19 वर्षीय मास्टरमाइंड जयराम पहले जयपुर में सक्रिय था। जब जयपुर पुलिस की सख्ती बढ़ी, तो वह अजमेर शिफ्ट हो गया। यहां आकर उसने बीएससी के छात्रों और अन्य बेरोजगार युवकों को लालच देकर अपना नया गैंग तैयार किया।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इस गैंग ने अजमेर से लेकर जयपुर तक कई लोगों को अपना शिकार बनाया है, जिनमें शहर के कई बड़े और नामी कारोबारी भी शामिल हैं। हालांकि, सामाजिक बदनामी और प्रतिष्ठा धूमिल होने के डर से ज्यादातर पीड़ितों ने पुलिस तक पहुंचने की हिम्मत ही नहीं जुटाई।
आगे की जांच जारी
अजमेर एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के सख्त निर्देशों पर अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और कितने रुपये की ठगी की है। फिलहाल, जयपुर पुलिस भी इन आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।











































