नुक्कड़ सभाएं नहीं, अब रील्स से होगा प्रचार! राजस्थान चुनाव में BJP-कांग्रेस के 'Gen Z' उम्मीदवारों ने बढ़ाई दिग्गजों की टेंशन

राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार चुनाव प्रचार का अंदाज बदल गया है। BJP और कांग्रेस ने बड़ी संख्या में 21 से 29 साल के 'Gen Z' उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। जानिए नेहा जोशी, पलक यादव और खुशबू आचार्य जैसे युवा चेहरों के बारे में।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 4, 2026 • 10:24 PM  33
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नुक्कड़ सभाएं नहीं, अब रील्स से होगा प्रचार! राजस्थान चुनाव में BJP-कांग्रेस के 'Gen Z' उम्मीदवारों ने बढ़ाई दिग्गजों की टेंशन
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4 Sep 2026
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नुक्कड़ सभाएं नहीं, अब रील्स से होगा प्रचार! राजस्थान चुनाव में BJP-कांग्रेस के 'Gen Z' उम्मीदवारों ने बढ़ाई दिग्गजों की टेंशन

राजस्थान के निकाय चुनावों में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चुनावी रण में अब सिर्फ पुराने और अनुभवी चेहरे ही नहीं, बल्कि 'Gen Z' (21 से 29 वर्ष के युवा) भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों ने युवा वोट बैंक को साधने के लिए युवा चेहरों पर बड़ा दांव खेला है। हालात यह हैं कि अब प्रचार का तरीका नुक्कड़ सभाओं से निकलकर इंस्टाग्राम रील्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच गया है।

युवाओं के हाथ में है जीत की चाबी

राजस्थान के 309 नगर निकायों (नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम) में करीब 1.40 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो:

  • 18 से 25 वर्ष के युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 14.7% है।

  • 26 से 35 वर्ष के मतदाताओं की संख्या करीब 25.4% है।

  • यानी, 35 साल तक के मतदाता ही चुनावी नतीजों की असली दिशा तय करेंगे।

इस विशाल वोट बैंक को देखते हुए टिकट वितरण में भी युवाओं को तरजीह दी गई है। BJP ने अपने कुल उम्मीदवारों में 51 फीसदी और कांग्रेस ने 49 फीसदी टिकट 40 साल से कम उम्र के चेहरों को दिए हैं। केवल जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा जैसे 5 प्रमुख शहरों में ही दोनों पार्टियों ने 70 से ज्यादा 'Gen Z' उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है।

टीवी जर्नलिस्ट से लेकर CA स्टूडेंट्स तक मैदान में

इस चुनाव में कई ऐसे युवा चेहरे सामने आए हैं, जिन्होंने अपना शानदार करियर छोड़कर राजनीति का रुख किया है:

  • नेहा जोशी (21 वर्ष), थानागाजी (अलवर): कुछ दिन पहले तक टीवी स्क्रीन पर खबरें पढ़ने वालीं नेहा अब BJP के टिकट पर थानागाजी से चुनाव लड़ रही हैं। सलवार-सूट और वॉकिंग शूज पहने नेहा अब गांव की महिलाओं के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनती हैं। नेहा का कहना है, "पानी, सड़क और सफाई जैसे मुद्दों के लिए विधायक का इंतजार क्यों करना? बदलाव लाना है तो शुरुआत खुद से करनी होगी।"

  • पलक यादव (21 वर्ष), विद्याधर नगर (जयपुर): महारानी कॉलेज की छात्रा और CA की पढ़ाई कर रहीं पलक को BJP ने जयपुर के वार्ड नंबर 10 से टिकट दिया है। यह उनका पहला चुनाव है और उनके चुनाव प्रचार की कमान खुद उनकी मां और भाई ने संभाल रखी है।

RAS की तैयारी छोड़ी, 'AI' से समस्याओं के समाधान की सोच

पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर में कांग्रेस की युवा उम्मीदवार खुशबू आचार्य का विजन बिल्कुल अलग है। RAS की तैयारी छोड़कर राजनीति में आईं खुशबू के पिता पूर्व पार्षद रह चुके हैं। खुशबू का विजन पारंपरिक राजनीति से अलग है।

वह कहती हैं, "आज के डिजिटल युग में लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लंबी कतारों में क्यों लगना पड़े? सरकारी सिस्टम में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल होना चाहिए।" पेपर लीक और भर्ती कैलेंडर जैसे युवाओं से जुड़े मुद्दे उनके एजेंडे में सबसे ऊपर हैं।

रील्स और 'GenZ for Change': प्रचार का नया डिजिटल अवतार

इस बार निकाय चुनाव सिर्फ दीवारों पर चिपके पोस्टर तक सीमित नहीं है। युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए दोनों पार्टियां नई रणनीतियां अपना रही हैं:

  • कांग्रेस का अभियान: कांग्रेस ने युवाओं से सीधे जुड़ने के लिए 'GenZ for Change' अभियान शुरू किया है। पार्टी का सोशल मीडिया सेल सीधे फर्स्ट-टाइम वोटर्स को टारगेट कर रहा है।

  • बीजेपी की रणनीति: BJP 'युवा वर्ग' पर फोकस करते हुए जिला और मंडल स्तर पर रील्स और शॉर्ट वीडियोज के जरिए अपना विजन युवाओं तक पहुंचा रही है।

अजमेर और जोधपुर में भी युवाओं की गूंज

अजमेर नगर निगम चुनाव में BJP के 24 वर्षीय पंकज सिंह राठौड़ और कांग्रेस के मोक्ष जैसे युवा मैदान में हैं। वहीं, काम्या सांखला जैसी निर्दलीय युवा प्रत्याशी भी सफाई जैसे मुद्दों को लेकर चुनौती दे रही हैं। जोधपुर में BJP ने 7 और कांग्रेस ने 10 युवाओं को टिकट दिया है। इनमें IAS की तैयारी कर रहीं कांग्रेस की सरस्वती प्रजापति और पॉलिटिकल साइंस में MA कर रहीं BJP की भाग्यश्री आचार्य प्रमुख हैं।

सियासत में पीढ़ीगत बदलाव की आहट

राजस्थान के निकाय चुनाव स्पष्ट रूप से संकेत दे रहे हैं कि स्थानीय राजनीति में एक नए युग (Generational Shift) की शुरुआत हो चुकी है। पार्टियां समझ चुकी हैं कि युवाओं को सिर्फ 'वोट बैंक' मानकर चुनाव नहीं जीता जा सकता, उन्हें नेतृत्व भी सौंपना होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये 'Gen Z' उम्मीदवार चुनाव जीतकर राजनीति में सचमुच नई सोच और काम करने का नया डिजिटल तरीका लागू कर पाएंगे? नतीजे जो भी हों, इस चुनाव ने राजस्थान की स्थानीय सियासत की तस्वीर जरूर बदल दी है।

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