मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। हाल ही में 17 जुलाई को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने मामले में लापरवाही बरतने पर संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) को निलंबित कर दिया।
इस पूरे मामले की शिकायत पूर्व उपसरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा ने सरकार और प्रशासन से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2025 के दौरान 54 फर्जी पट्टे जारी किए गए। जांच में प्रथम दृष्टया पट्टे फर्जी पाए गए, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई।
पूर्व सरपंच का पलटवार, कहा- मेरी मुहर चोरी कर फंसाया गया
सोमवार को 81 वर्षीय पूर्व सरपंच सावित्री देवी अपने पोते दीपक के साथ मीडिया के सामने आईं और खुद को निर्दोष बताते हुए पूरा आरोप पूर्व उपसरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा पर लगाया।
सावित्री देवी ने कहा कि प्रशासक नियुक्त होने के बाद उनकी फर्जी मुहर और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर पट्टे तैयार किए गए। उनका आरोप है कि पिछले 5-6 वर्षों से बलदेव उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं और जेल भेजने की धमकी देकर उनके पोते से 70 हजार रुपये भी वसूले गए।
उन्होंने पूरे मामले में अपने हस्ताक्षरों और मुहर की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वैज्ञानिक जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
पोते का आरोप- मुझसे भी लिए गए 70 हजार रुपये
पूर्व सरपंच के पोते दीपक ने भी आरोप लगाया कि उपसरपंच ने उनसे 70 हजार रुपये लिए थे। उन्होंने दावा किया कि पूरे फर्जीवाड़े में उनकी दादी को जानबूझकर फंसाया जा रहा है।
मृतकों के नाम पर भी जारी हुए पट्टे
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि वर्ष 2002 में मृत हो चुके व्यक्ति के नाम पर वर्ष 2025 में पट्टा जारी कर दिया गया।
बताया गया कि बूटा सिंह, जिनकी करीब 25 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी, उनके नाम पर भी पट्टा तैयार किया गया। बूटा सिंह पूर्व उपसरपंच बलदेव मल्होत्रा के पिता थे। इतना ही नहीं, एक अन्य दस्तावेज में बूटा सिंह को बलदेव का पुत्र दर्शा दिया गया, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है।
इसके अलावा कई पट्टों में पिता और पुत्र के नाम आपस में बदल दिए गए। पट्टा संख्या-18 सहित कई दस्तावेजों में समान विवरण के साथ अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज पाए गए।
परिवार के नाम भी मिले सात पट्टे
अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच जारी 54 विवादित पट्टों की जांच में सामने आया कि इनमें से 7 पट्टे पूर्व सरपंच सावित्री देवी के बेटों, पोतों और पुत्रवधू के नाम भी जारी किए गए थे। इसी आधार पर मामले की जांच और तेज कर दी गई है।
पंचायत में रिकॉर्ड नहीं, फिर भी हो गई रजिस्ट्री
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 के बाद पंचायत कार्यालय में इन पट्टों से संबंधित कोई फाइल या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
आरोप है कि बिना आवेदन, बिना निर्धारित शुल्क जमा कराए और बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर उन्हें सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत करा दिया गया। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण भी लिया गया।
उपसरपंच बोले- शिकायत वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव
दूसरी ओर, इस मामले का खुलासा करने वाले पूर्व उपसरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा ने भी जिला कलेक्टर को नया परिवाद सौंपा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत वापस लेने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की साजिश के तहत उनके नाम पर भी फर्जी पट्टा तैयार कर दिया गया है।
बलदेव ने पूर्व सरपंच के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि उन्होंने फर्जीवाड़ा किया होता तो दस्तावेजों में इतने स्पष्ट नाम और रिश्तों की गलतियां नहीं होतीं।
जांच पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में है। एक ओर पूर्व सरपंच खुद को निर्दोष बताते हुए फोरेंसिक जांच की मांग कर रही हैं, तो दूसरी ओर उपसरपंच शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगा रहे हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की विस्तृत जांच और दोषियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।