"चमड़ी की जूती भी बना लूं तो..." भरे मंच पर ऐसा क्या हुआ कि फूट-फूटकर रो पड़े पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी?

राजस्थान के बालोतरा में स्वर्गीय गोरधनराम विश्नोई की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने मंच से 36 कौम और अपने साथी का कर्ज न चुका पाने की बात कहते हुए जनता से माफी भी मांगी।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 3, 2026 • 11:42 AM  461
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"चमड़ी की जूती भी बना लूं तो..." भरे मंच पर ऐसा क्या हुआ कि फूट-फूटकर रो पड़े पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी?
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3 Sep 2026
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"चमड़ी की जूती भी बना लूं तो..." भरे मंच पर ऐसा क्या हुआ कि फूट-फूटकर रो पड़े पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी?

राजस्थान के बालोतरा जिले से एक बेहद भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहां धोरीमन्ना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी मंच पर ही फूट-फूटकर रो पड़े। मौका था कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय गोरधनराम विश्नोई की प्रतिमा के अनावरण का। अपने पुराने साथी को याद करते हुए हेमाराम चौधरी खुद पर काबू नहीं रख सके और उनके आंसू छलक पड़े। उन्हें रोता देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

'चमड़ी की जूती बना लूं तो भी कर्ज नहीं उतरेगा'

धोरीमन्ना स्थित अणदाणियों की ढाणी में प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम चल रहा था। जब हेमाराम चौधरी को भाषण के लिए बुलाया गया, तो शुरुआत में उन्होंने कहा कि पूर्व वक्ताओं ने गोरधनराम जी के बारे में काफी कुछ बता दिया है। लेकिन इसके बाद जैसे ही उन्होंने स्वर्गीय विश्नोई के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्तों और उनके योगदान का जिक्र छेड़ा, उनका गला रुंध गया।

उन्होंने रोते हुए कहा, "उनका मेरे ऊपर बहुत बड़ा ऋण है। मैं चुकाना चाहता था, लेकिन चाहकर भी चुका नहीं पाया। अंत में मूलधन की बस एक किस्त चुकाई है, बाकी कर्ज अभी भी मेरे ऊपर ही है।" अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे कहा, "मैं अगर अपनी चमड़ी की जूती भी बना लूं, तो भी गोरधनराम जी और मेरे समर्थन में हमेशा खड़ी रही 36 कौम का कर्ज कभी नहीं चुका पाऊंगा।" यह कहते-कहते वे मंच पर सिसक-सिसक कर रोने लगे।

45 साल के राजनीतिक सफर पर आत्ममंथन कर मांगी माफी

इस माहौल के बीच हेमाराम चौधरी ने अपने 45 वर्षों के लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने भरे मन से जनता से माफी मांगी। पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्हें साढ़े चार दशक तक जनसेवा की जो जिम्मेदारी मिली, उसे वे ठीक से नहीं निभा पाए। उन्होंने स्वीकार किया कि समाज और जनता ने उनसे जो अपेक्षाएं रखी थीं, वे उसके मुताबिक बहुत कम काम कर सके, जिसके लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं।

आंसुओं ने बयां की रिश्तों की गहराई

यह आयोजन मूल रूप से स्वर्गीय गोरधनराम विश्नोई के सम्मान और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए रखा गया था। लेकिन हेमाराम चौधरी के छलकते आंसुओं ने इस कार्यक्रम को एक अलग ही भावनात्मक आयाम दे दिया। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया।

पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहने वाला एक कद्दावर नेता अपने पुराने साथी की याद में एक आम इंसान की तरह टूट गया। पत्थर की प्रतिमा के सामने खड़े हेमाराम चौधरी के आंसुओं ने यह साबित कर दिया कि गोरधनराम विश्नोई उनके लिए केवल एक राजनीतिक सहयोगी नहीं थे, बल्कि उनके जीवन का एक ऐसा अहम हिस्सा थे, जिसके प्रति वे खुद को ताउम्र ऋणी मानते रहेंगे।

yashaswani

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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