LIC हाउसिंग के ₹1,322 करोड़ और 'गायब' नेटवर्थ: क्या सलाखों के पीछे जाएंगे Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा?

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से जुड़े 1,322 करोड़ रुपये के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में ज़ी के संस्थापक सुभाष चंद्रा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। सुभाष चंद्रा पर फर्जी नेटवर्थ दिखाकर लोन लेने का आरोप है।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
September 5, 2026 • 9:14 PM  108
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LIC हाउसिंग के ₹1,322 करोड़ और 'गायब' नेटवर्थ: क्या सलाखों के पीछे जाएंगे Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा?
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LIC हाउसिंग के ₹1,322 करोड़ और 'गायब' नेटवर्थ: क्या सलाखों के पीछे जाएंगे Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा?

ज़ी (Zee) के संस्थापक सुभाष चंद्रा (Subhash Chandra) एक बड़ी कानूनी मुश्किल में फंस गए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके और कई अन्य निजी कंपनियों व व्यक्तियों के खिलाफ ₹1,322 करोड़ के कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यह बैंक फ्रॉड LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से जुड़ा है।

मुख्य आरोपी नंबर 1 बने सुभाष चंद्रा

CBI द्वारा 31 अगस्त को दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में सुभाष चंद्रा को 'आरोपी नंबर 1' (Accused No. 1) बनाया गया है। उन पर आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), धोखाधड़ी (Cheating) और आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

क्या है ₹1,322 करोड़ के लोन का पूरा मामला?

यह पूरा विवाद LICHFL द्वारा व्यापार विस्तार और रेंटल सिक्योरिटाइजेशन के नाम पर विभिन्न कंपनियों को दिए गए लोन से जुड़ा है। इन लोन के लिए सुभाष चंद्रा ने निरंतर गारंटी (Continuing Guarantees) प्रदान की थी।

  • पहला लोन (₹500 करोड़): यह लोन सुविधा वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (सह-उधारकर्ता) को दी गई थी।

  • दूसरा लोन (₹480 करोड़): रेंटल सिक्योरिटाइजेशन स्कीम के तहत डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (सह-उधारकर्ता) को रेंटल डिस्काउंटिंग सुविधा के रूप में यह लोन दिया गया।

फर्जी 'नेटवर्थ सर्टिफिकेट' का खेल

FIR का हिस्सा बनी LICHFL की शिकायत के अनुसार, लोन देने के ये फैसले 2018 में सुभाष चंद्रा द्वारा जमा किए गए 'नेटवर्थ सर्टिफिकेट' के आधार पर लिए गए थे।

  • वसंत सागर लोन के लिए चंद्रा ने जो सर्टिफिकेट दिया, उसमें 31 मार्च 2017 तक उनकी कुल संपत्ति (Net Worth) ₹59,113 करोड़ बताई गई थी।

  • डिजिटल लोन फैसिलिटी के लिए 6 जुलाई 2018 को दिए गए सर्टिफिकेट में उन्होंने अपनी संपत्ति ₹40,562 करोड़ बताई।

बाद में ये दोनों लोन अकाउंट डिफॉल्ट (Default) हो गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब सुभाष चंद्रा के खिलाफ दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत कार्यवाही शुरू हुई, तो उन्होंने LICHFL को दिए गए अपने ही नेटवर्थ सर्टिफिकेट्स को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि 2017-18 में भी उनकी वास्तविक नेटवर्थ ₹40,000 करोड़ से अधिक नहीं थी।

LICHFL ने जताई देश छोड़कर भागने की आशंका

LICHFL ने CBI से मामले की तुरंत जांच की मांग करते हुए कहा है कि सुभाष चंद्रा और अन्य आरोपियों ने धोखाधड़ी करने के बेईमान इरादे से एक-दूसरे के साथ साठगांठ की है।

शिकायत में एक गंभीर आशंका भी जताई गई है कि आरोपी देश छोड़कर भाग सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि लोन की रकम (Proceeds of the loan) और आरोपियों की संपत्तियों का पता लगाने के लिए जल्द से जल्द जांच शुरू करना बेहद जरूरी है।

FIR में इन कंपनियों और डायरेक्टर्स के नाम भी शामिल

इस बड़े धोखाधड़ी मामले में CBI की FIR में सुभाष चंद्रा के अलावा कई अन्य नाम भी शामिल हैं:

  • वसंत सागर प्रॉपर्टीज और इसके डायरेक्टर पंकज सुरोलिया

  • पैन इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर

  • डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट और इसके डायरेक्टर अमीश पंड्या

  • स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स और इसके डायरेक्टर राजीव ढोलकिया

  • कुछ अन्य अज्ञात लोग

NCLT का फैसला और उस पर रोक

गौरतलब है कि पिछले महीने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सुभाष चंद्रा के एक रीपेमेंट प्लान (Repayment Plan) को मंजूरी दी थी, जिसके तहत उन्हें सिर्फ ₹6.5 करोड़ चुकाने थे। इसमें से ₹6.25 करोड़ लेनदारों (Creditors) को और ₹25 लाख दिवालिया प्रक्रिया की लागत के लिए दिए जाने थे।

इस मामले में मूल दावा लगभग ₹22,006.57 करोड़ का था। हालांकि, बाद में पांच सदस्यीय बेंच ने NCLT के इस आदेश पर रोक (Stay) लगा दी थी।

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