जयपुर से पहली बार ब्रिटेन पहुंची ज्वेलरी की खेप, भारत-यूके CETA से खुले निर्यात के नए रास्ते

भारत-यूके CETA समझौते के लागू होने के बाद जयपुर से पहली बार सोना, हीरा, चांदी और प्लेटिनम के आभूषणों की खेप ब्रिटेन भेजी गई है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 16, 2026 • 11:50 AM  5
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राजस्थान
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जयपुर से पहली बार ब्रिटेन पहुंची ज्वेलरी की खेप, भारत-यूके CETA से खुले निर्यात के नए रास्ते
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जयपुर से पहली बार ब्रिटेन पहुंची ज्वेलरी की खेप, भारत-यूके CETA से खुले निर्यात के नए रास्ते

राजस्थान की राजधानी जयपुर के जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग के लिए ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के लागू होने के बाद पहली बार जयपुर से सोना, हीरा, चांदी और प्लेटिनम के आभूषणों की खेप ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। इस पहली खेप का कुल मूल्य करीब 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया है।

इस निर्यात के साथ भारतीय आभूषण पहली बार Zero Duty (शून्य आयात शुल्क) के साथ ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश करेंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

चार प्रमुख निर्यातकों ने भेजी पहली खेप

जयपुर के चार प्रमुख जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यातकों ने इस ऐतिहासिक पहली खेप को ब्रिटेन भेजा है। शहर पहले से ही रंगीन रत्नों और हस्तनिर्मित आभूषणों के लिए दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखता है। अब CETA समझौते के बाद जयपुर के निर्यात कारोबार को नई रफ्तार मिलने की संभावना है।

4% आयात शुल्क खत्म, कारोबार को मिलेगा फायदा

भारत-यूके CETA के तहत ब्रिटेन द्वारा भारतीय आभूषणों पर लगाया जाने वाला करीब 4 प्रतिशत आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इससे भारतीय ज्वेलरी की कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी और निर्यातकों को ब्रिटिश बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

तीन साल में 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है निर्यात

उद्योग जगत का अनुमान है कि इस समझौते के बाद ब्रिटेन को भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात अगले तीन वर्षों में 754 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे निवेश, निर्यात, एमएसएमई, कारीगरों, डिजाइनरों और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सीमा शुल्क विभाग ने दिया सहयोग का भरोसा

सीमा शुल्क विभाग ने कहा है कि निर्यातकों को तेज और आसान क्लीयरेंस उपलब्ध कराया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति मिल सके। वहीं जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने इसे भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि और नए युग की शुरुआत बताया है।

GJEPC अध्यक्ष ने जताया आभार

GJEPC के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि भारत-यूके CETA के तहत पहली निर्यात खेप केवल आभूषणों का निर्यात नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक व्यापार के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।

अमेरिकी बाजार की अनिश्चितता के बीच बड़ी राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी बाजार में टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भारत-यूके CETA भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खोलने का महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा। खासकर जयपुर जैसे शहर, जहां जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है, वहां इस समझौते का सीधा लाभ देखने को मिल सकता है।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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