9 दिन व्रत नहीं रख सकते तो क्या करें? देवी भागवत पुराण का ये नियम जरूर जान लें

आज 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, अष्टमी-नवमी की तिथि और देवी भागवत पुराण के अनुसार 9 और 3 दिन के व्रत के नियम।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
October 11, 2026 • 11:38 AM  519
भ
भारत
NEWS CARD
Logo
9 दिन व्रत नहीं रख सकते तो क्या करें? देवी भागवत पुराण का ये नियम जरूर जान लें
“9 दिन व्रत नहीं रख सकते तो क्या करें? देवी भागवत पुराण का ये नियम जरूर जान लें”
Favicon
Read more onthekhatak.com/s/516e98
11 Oct 2026
https://thekhatak.com/s/516e98
Google News
Copied
9 दिन व्रत नहीं रख सकते तो क्या करें? देवी भागवत पुराण का ये नियम जरूर जान लें

आज 11 अक्टूबर, रविवार से शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो गया है। अगले नौ दिनों तक देश भर में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार तिथियों के विशेष संयोग के चलते 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी की पूजा एक साथ होगी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाएगा।

कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा को घट या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। आज कलश स्थापना के लिए श्रद्धालुओं को सुबह के समय करीब चार घंटे का शुभ मुहूर्त मिलेगा। इसके अलावा, जो लोग सुबह कलश स्थापित नहीं कर पाए हैं, वे दोपहर में 'अभिजीत मुहूर्त' में भी कलश स्थापना कर सकते हैं। शास्त्रों में अभिजीत मुहूर्त को किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

नवरात्रि की प्रमुख तिथियां एक नज़र में

इस वर्ष तिथियों के क्रम के अनुसार माता की आराधना के महत्वपूर्ण दिन इस प्रकार रहेंगे:

  • सप्तमी तिथि: 17 और 18 अक्टूबर को रहेगी।

  • महाष्टमी और महानवमी: 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों की पूजा संपन्न होगी।

  • विजयादशमी (दशहरा): 20 अक्टूबर को रावण दहन के साथ दशहरा मनाया जाएगा।

देवी भागवत पुराण के अनुसार व्रत के नियम

नवरात्रि में माता की आराधना के साथ-साथ उपवास का बहुत महत्व है। देवी भागवत पुराण में नौ दिनों की पूजा और व्रत के विस्तृत नियम बताए गए हैं:

  • 9 दिन का व्रत: जो श्रद्धालु शारीरिक रूप से सक्षम हैं, वे पूरे नौ दिन तक फलाहार या एक समय के सात्विक भोजन के साथ व्रत रख सकते हैं। इसमें शुद्धता और ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य माना गया है।

  • 3 दिन का उपवास का विधान: देवी भागवत पुराण में उन लोगों के लिए भी विशेष विधान है, जो स्वास्थ्य, कार्य या किसी अन्य कारणवश पूरे नौ दिन का उपवास नहीं कर सकते। ऐसे श्रद्धालु केवल तीन दिन का उपवास रखकर भी माता की कृपा और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आमतौर पर सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि को उपवास रखना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

yashaswani

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

Digital Archives

homeHomeamp_storiesWeb Storieslocal_fire_departmentTrendingplay_circleVideosmark_email_unreadNewsletter