नामांकन खिड़की खुली, पर टिकटों पर भारी सस्पेंस! जानिए क्यों आखिरी वक्त तक 'पत्ते' नहीं खोल रही पार्टियां?
राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के नामांकन शुरू हो गए हैं। जानें चुनाव की महत्वपूर्ण तारीखें, आचार संहिता के नियम और पाली जिले का पूरा चुनावी गणित।



राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में चुनावी बिगुल बज चुका है। राज्य में पंचायत चुनाव के पहले चरण के तहत जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए नामांकन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हो गई है। पहले फेज में प्रदेश के 16 जिलों की 104 पंचायत समितियों में चुनाव होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है।
क्या है नामांकन की प्रक्रिया और अहम तारीखें?
जिला परिषद सदस्यों के लिए नामांकन जिला स्तर पर और पंचायत समिति सदस्यों के लिए उपखंड स्तर पर दाखिल किए जा रहे हैं।
नामांकन की अंतिम तिथि: 13 अक्टूबर
नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny): 14 अक्टूबर
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर (दोपहर 3 बजे तक)
चुनाव चिह्न का आवंटन: 15 अक्टूबर (दोपहर 3 बजे के बाद)
मतदान की तारीख (जिला परिषद व पंचायत समिति): 22 अक्टूबर
मतदान की तारीख (पंच-सरपंच): 24 अक्टूबर (नोट: पंच और सरपंच पद के लिए पहले चरण के नामांकन 23 अक्टूबर से शुरू होंगे।)
टिकटों पर कांग्रेस और बीजेपी की 'वेट एंड वॉच' रणनीति
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अभी तक सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दल बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। दोनों ही प्रमुख पार्टियां फिलहाल दावेदारों के नामों पर मंथन कर रही हैं। चूंकि जिला परिषद और पंचायत समिति के चुने हुए सदस्यों में से ही क्रमशः जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव होना है, इसलिए इन पदों के दावेदार भी पूरी ताकत लगा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बगावत और भीतरघात से बचने के लिए दोनों पार्टियां 11 या 12 अक्टूबर के आसपास टिकटों की घोषणा कर सकती हैं। विवादित सीटों पर सीधे निर्वाचन अधिकारी के पास पार्टी सिंबल (B-Form) जमा कराने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है, जैसा कि हाल ही में शहरी निकाय चुनावों में देखने को मिला था।
आदर्श आचार संहिता लागू, इन चीजों पर रहेगी सख्त पाबंदी
चुनाव की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके तहत:
अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह रोक लग गई है।
मंत्री अब अपने प्रभार वाले या अन्य ग्रामीण इलाकों में सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
नेताओं के सरकारी गेस्ट हाउस और डाक बंगलों में ठहरने पर पाबंदी रहेगी।
सरकार किसी भी नई योजना या कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर सकेगी जिससे मतदाता प्रभावित हों। हालांकि, पहले से चल रहे विकास कार्य और टेंडर प्रक्रियाएं जारी रहेंगी।
आधी आबादी का दबदबा: 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
इस बार के पंचायतीराज चुनावों में कुल 1.69 लाख नए जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। राज्य में पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू है। इसका सीधा असर यह होगा कि 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों में से आधी संख्या महिलाओं की होगी। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में 7,200 महिला सरपंच और 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी। वहीं, 457 पंचायत समितियों में से 221 पर महिला प्रधान काबिज होंगी।
पाली जिले का चुनावी गणित और तैयारियां
पंचायत चुनाव को लेकर पाली कलेक्ट्रेट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भारी पुलिस बल तैनात है।
पहला चरण: सोजत, रानी, सुमेरपुर, बगड़ नगर और मारवाड़ जंक्शन। इसके लिए 642 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। यहां जिला परिषद के 18 वार्ड, पंचायत समिति के 95 वार्ड, 157 ग्राम पंचायतें और 1513 वार्डों के लिए वोट डाले जाएंगे।
दूसरा चरण: देसूरी, बाली, पाली और रोहट। यहां 528 बूथ बनाए गए हैं। जिला परिषद के 15 वार्ड, पंचायत समिति के 84 वार्ड, 146 ग्राम पंचायतें और 1418 वार्ड पंचों का चुनाव होगा।
कुल आंकड़े: दोनों चरणों को मिलाकर पाली जिले में कुल 33 जिला परिषद सदस्य, 179 पंचायत समिति सदस्य, 303 सरपंच और 2931 वार्ड पंच चुने जाएंगे, जिसके लिए जिले में कुल 1170 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।













































