प्रसूताओं की मौत पर अस्पताल का पक्ष: डॉक्टर बोले- मरीज गंभीर थीं, एक को हार्ट अटैक आया; परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने का लगाया आरोप

भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में 10 दिनों के भीतर 9 प्रसूताओं की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन और परिजनों के दावे आमने-सामने हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सभी मरीज गंभीर हालत में थीं और एक प्रसूता की मौत हार्ट अटैक से हुई, जबकि परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने और खून नहीं चढ़ाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की जांच के लिए विशेष मेडिकल कमेटियां गठित की गई हैं।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 11, 2026 • 5:05 PM  4
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राजस्थान
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प्रसूताओं की मौत पर अस्पताल का पक्ष: डॉक्टर बोले- मरीज गंभीर थीं, एक को हार्ट अटैक आया; परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने का लगाया आरोप
“प्रसूताओं की मौत पर अस्पताल का पक्ष: डॉक्टर बोले- मरीज गंभीर थीं, एक को हार्ट अटैक आया; परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने का लगाया आरोप”
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प्रसूताओं की मौत पर अस्पताल का पक्ष: डॉक्टर बोले- मरीज गंभीर थीं, एक को हार्ट अटैक आया; परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने का लगाया आरोप

राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु अस्पताल (MCH) में 6 दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं और बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 4 दिनों के भीतर 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। सभी महिलाओं की सिजेरियन (ऑपरेशन) से डिलीवरी हुई थी। बांसवाड़ा में मृत प्रसूताओं में एक नाबालिग भी शामिल है।

इधर, एक प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए शव परिजनों को सौंप दिया। साथ ही उनसे इमरजेंसी में खून मंगवाया गया, लेकिन वह मरीज को चढ़ाया ही नहीं गया और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

परिजनों का आरोप- रात तक ठीक थी, सुबह अचानक बिगड़ी तबीयत

बांसवाड़ा जिले के अरथूना क्षेत्र के कानेला गांव निवासी मृतका लीला के जेठ संजय खांट ने बताया कि लीला की सिजेरियन डिलीवरी के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ थी। उसने रात तक अपने पति, सास और अन्य परिजनों से बातचीत भी की थी और खुश थी।

उन्होंने बताया कि सुबह अस्पताल प्रशासन ने अचानक सूचना दी कि लीला का ब्लड प्रेशर काफी नीचे चला गया है और वह बेहोश हो गई है। इसके बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया और परिजनों को मिलने से रोक दिया गया।

संजय खांट का कहना है कि लीला का हीमोग्लोबिन 12 ग्राम था, जो सामान्य माना जाता है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने अचानक खून की कमी बताते हुए चार यूनिट ब्लड मंगवाया। परिजनों ने तुरंत खून की व्यवस्था कर दी, लेकिन आरोप है कि वह खून मरीज को चढ़ाया ही नहीं गया और कुछ देर बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने कहा कि यदि पोस्टमॉर्टम करवाना है तो संबंधित थाना पुलिस के आने तक इंतजार करना होगा। इसके बाद अस्पताल ने लिखित में ले लिया कि परिजन पोस्टमॉर्टम नहीं करवाना चाहते और बिना पोस्टमॉर्टम किए शव उन्हें सौंप दिया गया।

बांसवाड़ा कलेक्टर बोले- जांच के लिए बनाई गई विशेष कमेटी

बांसवाड़ा कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया कि अस्पताल में लक्ष्मी (21), लीला (32), रेशमा (28) और एक नाबालिग प्रसूता की मौत हुई है। इनमें से दो महिलाओं को गंभीर हालत में अन्य अस्पतालों से रेफर किया गया था, जबकि दो की सिजेरियन डिलीवरी यहीं हुई थी।

उन्होंने बताया कि सभी मौतों के कारणों की जांच के लिए पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की विशेष जांच समिति गठित की गई है। जयपुर से भी वरिष्ठ विशेषज्ञों की टीम जांच में शामिल होगी।

ऑपरेशन थिएटर से लिए गए सैंपल

कलेक्टर ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका को देखते हुए सैंपल लिए गए हैं। साथ ही दवाइयों के संभावित रिएक्शन, एनेस्थीसिया और मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री की भी जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी परिजन को लगता है कि उन्हें गुमराह किया गया है या किसी प्रकार की लापरवाही हुई है, तो वे अस्पताल प्रशासन या पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भीलवाड़ा अस्पताल प्रशासन का पक्ष

भीलवाड़ा महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने कहा कि सभी प्रसूताएं गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थीं और डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि पहली महिला गैस्ट्रो शॉक की स्थिति में अस्पताल आई थी। दूसरी प्रसूता की मौत हार्ट अटैक से हुई, जिसका पूरा डॉक्यूमेंटेशन मौजूद है। तीसरी महिला की मौत ऑपरेशन के बाद थ्रोम्बो-एम्बोलिज्म जैसी सामान्य चिकित्सा जटिलता के कारण हुई, जबकि बाकी दो मामलों में पोस्ट पार्टम हेमरेज (PPH) हुआ। उन्होंने कहा कि सभी मामलों की माइक्रो लेवल पर जांच कराई जा रही है ताकि मौतों के वास्तविक कारण सामने आ सकें।

भीलवाड़ा कलेक्टर ने भी दिए जांच के निर्देश

भीलवाड़ा कलेक्टर ने बताया कि 26 जून की जांच रिपोर्ट में ऑपरेशन थिएटर-2 में संक्रमण मिलने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद उस ऑपरेशन थिएटर को बंद कर दिया गया है, जबकि ऑपरेशन थिएटर-1 में सेवाएं जारी हैं। राज्य स्तर की जांच टीम जल्द ही अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

लगातार हो रही प्रसूताओं की मौतों और परिजनों के गंभीर आरोपों के बाद दोनों जिलों में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अलर्ट पर है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतों की वजह मेडिकल जटिलताएं थीं, संक्रमण था या फिर किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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