विदेशी मेहमान, मूंछों का ताव और ऊंटनी के दूध की होड़! जानिए में इस बार पशुपालकों पर क्यों कसा गया शिकंजा?
विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला इस साल 10 नवंबर से 26 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसका आधिकारिक और धार्मिक शुभारंभ 17 नवंबर को होगा।



राजस्थान की रेतीली धरती पर आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। देसी और विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाला यह रंगारंग मेला इस साल 10 नवंबर से 26 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। जहां एक तरफ विदेशी मेहमान साफा बांधने और पारंपरिक खेलों का लुत्फ उठाएंगे, वहीं प्रशासन ने मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पशुपालकों पर कुछ सख्त नियम भी लागू किए हैं।
पशुपालकों के लिए कड़े नियम: हेल्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य
इस बार पुष्कर मेले की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। मेले में हिस्सा लेने वाले सभी पशुओं के लिए सरकारी पशु चिकित्सालय से 'हेल्थ सर्टिफिकेट' लाना अनिवार्य कर दिया गया है।
अधिकारियों द्वारा इस प्रमाणपत्र के सत्यापन के बाद ही पशुपालकों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पूरे मेला मैदान को 10 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। घोड़ों के लिए लगभग 1600 प्लॉट आरक्षित किए गए हैं, जबकि ऊंटों के लिए सावित्री माता मंदिर और सैंडड्यून्स के पास एक बड़ा खुला मैदान तय किया गया है।
पहली बार देखने को मिलेंगे ये अनूठे मुकाबले
इस साल का मेला कई मायनों में खास होने वाला है। पारंपरिक प्रतियोगिताओं के अलावा कुछ नए और बेहद रोमांचक इवेंट्स भी शामिल किए गए हैं:
60 किमी हॉर्स एंड्योरेंस राइड: मेले के इतिहास में पहली बार घोड़ों की फिटनेस परखने के लिए 60 किलोमीटर की रेस होगी। इसे 20-20 किलोमीटर के तीन चरणों (लूप) में बांटा गया है। हर चरण के बाद घोड़ों की धड़कन और डिहाइड्रेशन की जांच होगी। अनफिट पाए जाने पर घोड़े को तुरंत रेस से बाहर कर दिया जाएगा।
रेवाल चाल प्रतियोगिता: मारवाड़ी घोड़ों की खास 'रेवाल चाल' को परखने के लिए एक किलोमीटर की प्रतियोगिता होगी, जिसमें घोड़े की रफ्तार के साथ-साथ उसकी सहनशक्ति और राइडर का स्टेमिना देखा जाएगा।
ऊंटनी के दूध की प्रतियोगिता: कैमल पोलो के साथ-साथ इस बार यह भी देखा जाएगा कि किस पशुपालक की ऊंटनी निर्धारित समय और प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दूध देती है। विजेता को खास तौर पर सम्मानित किया जाएगा।
17 नवंबर से होगा मेले का विधिवत आगाज
वैसे तो मेले की अनौपचारिक शुरुआत 10 नवंबर से ही हो जाएगी, लेकिन इसका आधिकारिक और धार्मिक शुभारंभ 17 नवंबर को होगा। इस दिन सुबह 10 बजे मेला ग्राउंड में पूजा-अर्चना, ध्वजारोहण और नगाड़ा वादन किया जाएगा। इसके साथ ही ब्रह्मा मंदिर से एक भव्य मशाल यात्रा भी निकाली जाएगी।
सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताओं का पूरा शेड्यूल:

17 नवंबर: सुबह 11 बजे स्थानीय खिलाड़ियों और विदेशी मेहमानों के बीच रोमांचक 'चक दे राजस्थान' फुटबॉल मैच। शाम को पुष्कर सरोवर पर दीपदान, महाआरती और राजस्थानी लोक कलाकारों की प्रस्तुति।
18 नवंबर: सुबह पारंपरिक खेल जैसे लंगड़ी टांग, गिल्ली-डंडा और सतोलिया का आयोजन। दोपहर में ऊंटों की सजावट और उनका मनमोहक नृत्य।
19 नवंबर: सुबह 10 बजे से स्थानीय और विदेशियों के बीच कबड्डी मैच, इसके बाद घोड़ों का आकर्षक डांस और ग्रामीण खेल (रस्साकशी, वॉलीबॉल)।
20 नवंबर: सुबह गुरुद्वारा से मेला ग्राउंड तक स्पिरिचुअल वॉक। शाम 4 बजे शिल्पग्राम में जायकेदार 'फूड एंड क्राफ्ट फेस्टिवल' का उद्घाटन।
21 नवंबर: विदेशी पर्यटकों के बीच साफा (पगड़ी) बांधने की होड़ और राजस्थानी रौब का प्रतीक 'मूंछ प्रतियोगिता'।
22 नवंबर: महिला पर्यटकों के लिए मटका रेस और म्यूजिकल चेयर जैसी मजेदार प्रतियोगिताएं।
23 नवंबर: आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र—भारत और विदेशियों के बीच 'लगान' फिल्म की तर्ज पर खेला जाने वाला महा-क्रिकेट मैच।
24 नवंबर: मेगा कल्चरल इवेंट और पशुपालकों के लिए भव्य पुरस्कार वितरण समारोह।
इस बार मेले में एक ग्रैंड बॉलीवुड नाइट का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसके लिए जल्द ही मशहूर गायक के नाम और तारीख का ऐलान प्रशासन द्वारा किया जाएगा।
चाक-चौबंद रहेगी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था
लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुष्कर के सभी 52 घाटों के खतरनाक स्थानों पर रस्सियां और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एसडीआरएफ (SDRF), सिविल डिफेंस और मजिस्ट्रेट की तैनाती रहेगी।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शहर में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाएगी। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए 2000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। पर्यटन विभाग सोशल मीडिया के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मेले का प्रचार कर रहा है, ताकि राजस्थानी संस्कृति की इस अनूठी झलक को दुनिया भर के लोग देख सकें।












































