64 साल का साथ, मौत भी नहीं कर पाई जुदा: बुजुर्ग दंपती का एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार

जालोर के भवराणी गांव में 'साथ जिएंगे, साथ मरेंगे' की कहावत सच साबित हुई। 90 वर्षीय पत्नी के निधन का सदमा 89 वर्षीय पति बर्दाश्त नहीं कर सके और डेढ़ घंटे बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
August 24, 2026 • 4:20 PM  3
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राजस्थान
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64 साल का साथ, मौत भी नहीं कर पाई जुदा: बुजुर्ग दंपती का एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार
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64 साल का साथ, मौत भी नहीं कर पाई जुदा: बुजुर्ग दंपती का एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार

राजस्थान के जालोर जिले से सच्चे प्रेम और अटूट बंधन की एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। जिले के भवराणी गांव में एक बुजुर्ग दंपती ने जीवन के 64 वसंत एक-दूसरे के साथ देखने के बाद, दुनिया को भी एक साथ ही अलविदा कहा। 90 वर्षीय पत्नी पुनी देवी के निधन का सदमा 89 वर्षीय पति दरगाराम प्रजापत बर्दाश्त नहीं कर सके और महज डेढ़ घंटे के भीतर उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए। दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पत्नी के निधन के डेढ़ घंटे बाद पति ने भी तोड़ा दम

परिजनों के अनुसार, शनिवार सुबह पुनी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। चक्कर आने के बाद सुबह करीब 11 बजे उनका देहांत हो गया। जब पोती पिंकी ने यह दुखद खबर अपने दादा दरगाराम को दी, तो वे गहरे सदमे में चले गए। अपनी जीवनसंगिनी के बिछड़ने का गम उन पर इस कदर हावी हुआ कि दोपहर 12:30 बजे दरगाराम ने भी घर पर अपनी अंतिम सांस ली। एक ही दिन में परिवार के दो बड़े बुजुर्गों के उठ जाने से पूरा गांव गमगीन हो गया।

गठजोड़ बांधकर निकली अंतिम यात्रा, हर आंख हुई नम

दंपती की अंतिम यात्रा ने हर ग्रामीण की आंखें नम कर दीं। परिजनों ने दोनों की अर्थियों को वैवाहिक गठजोड़े में बांधकर श्मशान घाट की ओर प्रस्थान किया। ग्रामीणों का कहना था कि यह दृश्य ऐसा था मानो कोई 'दूल्हा' अपनी 'दुल्हन' के साथ निकला हो, बस फर्क यह था कि इस बार मंजिल घर नहीं बल्कि बैकुंठ धाम थी। श्मशान घाट पर गठजोड़े में बंधी दोनों अर्थियों के पेड़ के फेरे करवाए गए। इसके बाद बड़े बेटे कालूराम ने एक ही चिता पर माता-पिता को मुखाग्नि दी।

सादगी और सात्विक जीवन की मिसाल था दंपती

दरगाराम के भतीजे नवराज और चचेरे भाई जितेंद्र कुमार ने बताया कि दरगाराम और पुनी देवी का विवाह 27 मार्च 1962 को हुआ था। पेशे से किसान दरगाराम और उनकी पत्नी ने हमेशा सादगीपूर्ण और नशामुक्त जीवन जिया। यही कारण था कि बिना किसी लंबी या गंभीर बीमारी के उन्होंने उम्र के इस पड़ाव तक एक स्वस्थ जीवन बिताया। उनके भरे-पूरे परिवार में चार बेटे (कालूराम, भैराराम, जूठाराम और भगाराम) और 18 पोते-पोतियां हैं। इनमें से दो बेटे गुजरात में कारोबार करते हैं और दो गांव में खेती संभालते हैं।

ग्रामीण उनके इस तरह एक साथ संसार से विदा होने को उनके सात्विक जीवन और पूर्व जन्मों के पुण्य का फल मान रहे हैं। जिन हाथों ने 64 साल पहले एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा किया था, वो जीवन की अंतिम यात्रा तक नहीं छूटा।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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