श्रीगंगानगर में डॉ. मोहित टांटिया की अनूठी पहल 'गर्भाशक्ति': मातृत्व को संबल, बेटी के जन्म पर 1 किलो देशी घी का उपहार
श्रीगंगानगर के डॉ. एस.एस. टांटिया मेडिकल कॉलेज की 'गर्भाशक्ति' योजना गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान बन रही है। डॉ. मोहित टांटिया के नेतृत्व में अस्पताल बेटी के जन्म का जश्न मनाते हुए 1 किलो देशी घी और गर्भवती महिलाओं को मुफ्त इलाज की सुविधा दे रहा है।



नारी को केवल शक्ति का प्रतीक मानकर पूजने के बजाय, उसके स्वास्थ्य और मातृत्व को सुरक्षित करना ही उसका सच्चा सम्मान है। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर, जहां देशभर में नारी शक्ति की आराधना हो रही है, वहीं श्रीगंगानगर का डॉ. एस.एस. टांटिया मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर एक मिसाल पेश कर रहा है। यहां की 'गर्भाशक्ति' योजना चिकित्सा को व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सामाजिक सरोकार और संवेदना का रूप दे रही है।
अस्पताल के वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया के युवा नेतृत्व में यह संस्थान मरीजों को सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि भरोसा और अपनत्व दे रहा है।
'गर्भाशक्ति' योजना: गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान
गर्भवती मां और गर्भस्थ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 20 मार्च 2023 को 'गर्भाशक्ति' योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को आयरन और कैल्शियम की गोलियों के साथ-साथ टीटी (TT) के इंजेक्शन बिल्कुल निःशुल्क लगाए जाते हैं। यह पहल उन परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है, जिनके लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित मेडिकल खर्च उठाना एक आर्थिक चुनौती बन जाता है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, अब तक 10 हजार से ज्यादा महिलाएं इस शानदार योजना का लाभ उठा चुकी हैं।
बेटी के जन्म पर जश्न: मां को मिलता है 1 किलो देशी घी
समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए इस योजना का एक बेहद भावनात्मक पहलू भी है। अस्पताल में जब भी किसी बेटी का जन्म होता है, तो उसका स्वागत एक उत्सव की तरह किया जाता है। बालिका के जन्म पर प्रसूता को अस्पताल की ओर से एक किलो शुद्ध देशी घी उपहार स्वरूप दिया जाता है। यह सिर्फ एक भेंट नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने की कोशिश है कि बेटी का जन्म बोझ नहीं, बल्कि खुशियों का अवसर है।
5 हजार से ज्यादा बच्चों की गूंजी किलकारियां
यह अस्पताल हजारों परिवारों की उम्मीदों का केंद्र बन चुका है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024 से लेकर अब तक यहां 2,567 बालकों और 2,465 बालिकाओं का जन्म हो चुका है। इन 5 हजार से ज्यादा नवजातों की किलकारियां इस बात का प्रमाण हैं कि क्षेत्र के लोग इस संस्थान की सुविधाओं और संवेदनाओं पर कितना गहरा भरोसा करते हैं।
जन सेवा का उत्कृष्ट मॉडल: 10 रुपये में OPD
डॉ. मोहित टांटिया की जनकल्याणकारी सोच केवल एक योजना तक सीमित नहीं है। यहां स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के हर तबके तक पहुंचाने के लिए 'जन सेवा हॉस्पिटल' में मात्र 10 रुपये में OPD और 20 रुपये में IPD की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा लाडो और राजश्री जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रसूताओं को दिलवाया जा रहा है। यहां प्रसव सुविधाएं बेहद कम दरों पर उपलब्ध हैं ताकि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण बेहतर इलाज से वंचित न रहे।
‘इलाज’ से पहले ‘इंसान’ की फिक्र
डॉ. मोहित टांटिया की कार्यशैली साबित करती है कि चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीक और बिल्डिंग से ज्यादा जरूरी मरीज के प्रति संवेदना है। लाभ से पहले सेवा और व्यवस्था से पहले संवेदना को प्राथमिकता देने वाला यह 'गर्भाशक्ति' मॉडल आज पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन गया है। नवरात्र के दिनों में जब कन्या पूजन होता है, तब टांटिया अस्पताल की यह पहल सही मायनों में नारी गरिमा और मातृत्व की वंदना कर रही है।












































