अब बेफिक्र होकर करें UPI पेमेंट, नहीं कटेगा कोई एक्स्ट्रा चार्ज, जानिए NPCI का नया फैसला
NPCI ने त्योहारी सीजन और व्यापारियों की मांग को देखते हुए 2000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है। जानें ग्राहकों और व्यापारियों पर इसका क्या असर होगा।



हारी सीजन (Festive Season) के बीच व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए एक राहत भरी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। पहले यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था, लेकिन अब इसे दिवाली के बाद यानी नवंबर के दूसरे सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
NPCI की 'यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी' ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि त्योहारी सीजन की व्यस्तता को ध्यान में रखते हुए चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर MDR तुरंत प्रभाव से दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। इसकी सटीक तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।
त्योहारी सीजन के चलते लिया गया फैसला
त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में खरीदारी जोरों पर होती है और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी काफी बढ़ जाता है। व्यापारियों ने सरकार और NPCI से अपील की थी कि पीक शॉपिंग सीजन के दौरान नए चार्जेज लागू करने से सिस्टम को अपडेट करने में परेशानी हो सकती है। इसी मांग को स्वीकार करते हुए पेमेंट्स कंपनियों और ग्राहकों को सिस्टम अपडेट करने का अतिरिक्त समय दिया गया है।
कितना लगेगा चार्ज और किसे देना होगा?
सितंबर में यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से अधिक के P2M (व्यक्ति से व्यापारी) यूपीआई भुगतान पर 0.4% MDR तय किया था।
इसका मतलब है कि अगर कोई ग्राहक 2,000 रुपये खर्च करता है, तो मर्चेंट (व्यापारी) को 8 रुपये और 10,000 रुपये पर 40 रुपये बतौर शुल्क देने होंगे।
इस शुल्क की अधिकतम सीमा (Cap) 300 रुपये तय की गई है (75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर)।
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, पेट्रोल पंप और कृषि उत्पादों जैसे विशेष सेक्टर्स में 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा।
आम आदमी पर नहीं पड़ेगा कोई असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस शुल्क का बोझ ग्राहकों (Consumers) पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। यह चार्ज केवल व्यापारियों को देना होगा। इसके अलावा:
आम लोगों के बीच होने वाले लेनदेन (Peer-to-Peer) पूरी तरह से फ्री रहेंगे।
रोजमर्रा की छोटी-मोटी खरीदारी और छोटे व्यापारियों को किए गए पेमेंट पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा।
सरकार ने क्यों लिया MDR लगाने का फैसला?
केंद्र सरकार के अनुसार, यूपीआई के बढ़ते ढांचे (Infrastructure), साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और बेहतर कस्टमर सपोर्ट सिस्टम को बनाए रखने के लिए भारी भरकम फंड की जरूरत होती है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई संचालन की लागत सालाना लगभग 20,000 करोड़ रुपये आती है। सरकार का तर्क है कि लंबे समय तक केवल सरकारी सब्सिडी के भरोसे इतने बड़े सिस्टम को चलाना संभव नहीं है, इसलिए इस इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह शुल्क प्रस्तावित किया गया है।












































