कोटा थर्मल प्लांट में डरावना हादसा: 12 फीट लंबे अजगर ने मजदूर का पैर जकड़ लिया, 20 मिनट तक चली मुश्किल भरी जद्दोजहद

कोटा थर्मल प्लांट में काम कर रहे मजदूर नंद सिंह पर 12 फीट लंबे विशाल अजगर ने पैर जकड़ लिया। चीख-पुकार सुनकर साथी दौड़े और 20 मिनट की मशक्कत के बाद अजगर को छुड़ाया। मजदूर सुरक्षित, वीडियो वायरल।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
November 24, 2025 • 3:51 PM  1.2k
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राजस्थान
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कोटा थर्मल प्लांट में डरावना हादसा: 12 फीट लंबे अजगर ने मजदूर का पैर जकड़ लिया, 20 मिनट तक चली मुश्किल भरी जद्दोजहद
“कोटा थर्मल प्लांट में डरावना हादसा: 12 फीट लंबे अजगर ने मजदूर का पैर जकड़ लिया, 20 मिनट तक चली मुश्किल भरी जद्दोजहद”
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24 Nov 2025
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कोटा थर्मल प्लांट में डरावना हादसा: 12 फीट लंबे अजगर ने मजदूर का पैर जकड़ लिया, 20 मिनट तक चली मुश्किल भरी जद्दोजहद

कोटा, 24 नवंबर 2025: राजस्थान के कोटा शहर में स्थित थर्मल प्लांट पर आज एक ऐसी घटना घटी, जिसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। एक मजदूर पर अचानक 10 से 12 फीट लंबे विशालकाय अजगर ने हमला कर दिया। अजगर ने मजदूर के पैर को इतनी मजबूती से जकड़ लिया कि उसे छुड़ाने में करीब 20 मिनट की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की है, जब प्लांट के कार्यक्षेत्र में काम चल रहा था। यह वाकया कृष्ण इंजीनियरिंग ठेकेदार कंपनी के कर्मचारी नंद सिंह के साथ हुआ, जिसकी वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

घटना का पूरा विवरण;  कोटा थर्मल प्लांट, जो शहर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है, वहां बिजली उत्पादन के लिए दिन-रात काम चलता रहता है। आज सुबह के समय, जब मजदूर अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक एक बड़ा अजगर प्लांट के किसी कोने से निकल पड़ा। यह अजगर करीब 10 से 12 फीट लंबा और मोटा था, जो सामान्य अजगरों से कहीं अधिक विशाल था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संभवतः भारतीय चट्टान अजगर (Indian Rock Python) की प्रजाति का हो सकता है, जो राजस्थान के जंगली इलाकों में पाया जाता है। प्लांट के आसपास के क्षेत्र में कभी-कभी जंगली जानवरों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन इतने बड़े अजगर का हमला दुर्लभ है।नंद सिंह, जो कृष्ण इंजीनियरिंग ठेकेदार कंपनी में मजदूर के रूप में कार्यरत हैं, उस समय प्लांट के एक हिस्से में मरम्मत का काम कर रहे थे। अचानक अजगर ने उन पर धावा बोल दिया और उनके दाएं पैर को कसकर जकड़ लिया। नंद सिंह दर्द से चीखने लगे और मदद के लिए पुकारते रहे। उनकी चीखें सुनकर साथी मजदूर दौड़ पड़े। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नंद सिंह जमीन पर गिर पड़े हैं, जबकि अजगर उनके पैर को मुट्ठी की तरह पकड़े हुए है। अजगर की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह पैर को छोड़ने को तैयार ही नहीं था।

बचाव की कवायद: 20 मिनट की जद्दोजहद साथी मजदूरों ने तुरंत बचाव का प्रयास शुरू कर दिया। उन्होंने लकड़ियों, लोहे की रॉड और अन्य उपलब्ध सामानों से अजगर को ढीला करने की कोशिश की। एक मजदूर ने बताया, "हमने अजगर के सिर को पकड़कर खींचा, लेकिन वह जकड़न नहीं छोड़ रहा था। नंद सिंह चिल्ला रहे थे, उनका पैर सूजने लगा था। हमें डर था कि कहीं अजगर और कस जाए।" लगभग 20 मिनट की मशक्कत के बाद, मजदूरों ने अजगर को मजबूरन छुड़ाया। इस दौरान किसी ने अजगर को चोट नहीं पहुंचाई, बल्कि उसे प्लांट से बाहर सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया। वन विभाग को सूचना दी गई है, जो बाद में जांच करेगा।वीडियो फुटेज में घटना की भयावहता साफ झलकती है। करीब 30 सेकंड का यह वीडियो प्लांट के एक साथी ने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया था। इसमें नंद सिंह की चीखें और साथियों की हड़बड़ी साफ सुनाई दे रही है। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोग हैरान हैं, और कई ने वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ कार्यस्थलों पर सुरक्षा उपायों की मांग की है।

नंद सिंह की हालत: मामूली चोटें, लेकिन सदमा गहरा बचाव के बाद नंद सिंह को तुरंत प्लांट के मेडिकल यूनिट में ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके पैर पर सूजन और मामूली खरोंचें आई हैं, लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं हुई है। अजगर ने दंश नहीं किया, सिर्फ जकड़ लिया था, जो सौभाग्य की बात है। नंद सिंह ने बताया, "मैं काम कर रहा था, अचानक कुछ भारी सा पैर पर लिपट गया। डर से मैं कुछ समझ ही नहीं पाया। चीखा तो साथी आए, वरना जान भी जा सकती थी। अब ठीक हूं, लेकिन कल सोचकर ही डर लगता है।" कंपनी प्रबंधन ने उन्हें कुछ दिनों की छुट्टी दे दी है और चिकित्सा सुविधा का आश्वासन दिया है।

विशेषज्ञों की राय: प्लांट क्षेत्र में वन्यजीवों का खतरा

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कोटा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास जंगलों का सिकुड़ना अजगर जैसे सरीसृपों को मानवीय बस्तियों में धकेल रहा है। डॉ. राजेश शर्मा, एक वन्यजीव विशेषज्ञ ने कहा, "अजगर शिकारी नहीं होते, लेकिन भूख या खतरे में वे खुद का बचाव करते हैं। थर्मल प्लांट जैसे स्थानों पर नियमित सर्वे और जागरूकता जरूरी है।" स्थानीय प्रशासन ने प्लांट प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बाड़ लगाई जाए और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाए।

 

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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