87 दिन जेल में बेगुनाह नेत्रहीन की आंसुओं भरी कहानी: पुलिस की साजिश उजागर, भाई ने हाईकोर्ट से दिलाई रिहाई

राजस्थान के चूरू में दृष्टिहीन अमिचंद को झूठे मारपीट केस में 87 दिन जेल में रहना पड़ा, लेकिन उनके भाई संदीप की कोशिशों और हाईकोर्ट के आदेश से उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस की लापरवाही और सांठगांठ के कारण यह अन्याय हुआ।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 16, 2025 • 5:32 PM  960
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87 दिन जेल में बेगुनाह नेत्रहीन की आंसुओं भरी कहानी: पुलिस की साजिश उजागर, भाई ने हाईकोर्ट से दिलाई रिहाई
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87 दिन जेल में बेगुनाह नेत्रहीन की आंसुओं भरी कहानी: पुलिस की साजिश उजागर, भाई ने हाईकोर्ट से दिलाई रिहाई

राजस्थान के चूरू जिले के सिद्धमुख तहसील के भीमसाना गांव में रहने वाले 28 वर्षीय अमिचंद को एक झूठे मारपीट के मामले में 87 दिन तक जेल में रहना पड़ा। जन्म से ही काला मोतिया (ग्लूकोमा) बीमारी के कारण धुंधला दिखाई देने वाले अमिचंद को पुलिस ने बिना ठोस सबूत के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उनकी रिहाई के लिए उनके दृष्टिहीन भाई संदीप की कोशिशों और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार न्याय मिला।

इस साल होली के त्योहार के दौरान 14 मार्च को जोथड़ा गांव में पांच लोगों ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की थी। इस मामले में चूरू के तारानगर थाने में तीन लोगों के खिलाफ नामजद और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। परिवार के आरोप के अनुसार, इस मामले में एक आरोपी पवन ने पुलिस से सांठगांठ कर अपने स्थान पर अमिचंद को आरोपी बना दिया। पुलिस ने 26 मार्च को अमिचंद को गिरफ्तार कर राजगढ़ जेल भेज दिया।

पवन ने अमिचंद के परिवार को गुमराह करते हुए कहा कि उसे काम के लिए जम्मू भेजा गया है। लगभग एक महीने तक परिवार को अमिचंद के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इस दौरान अमिचंद जेल में अपनी बेगुनाही की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी बात न तो पुलिस ने सुनी और न ही मजिस्ट्रेट ने।

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