ब्रिक्स की एकजुटता से अमेरिका पर आर्थिक चोट, चीन ने ब्राजील को चुना, अमेरिकी किसानों में हाहाकार.
ब्रिक्स देशों ने टैरिफ युद्ध में अमेरिका पर आर्थिक दबाव बढ़ाया। चीन ने अमेरिका से सोयाबीन आयात बंद कर ब्राजील को चुना, जिससे अमेरिकी किसानों को झटका लगा। दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन खरीदार चीन ने सितंबर-अक्टूबर 2025 के लिए अमेरिका से कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया। परेशान किसानों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी कि वे अपने सबसे बड़े ग्राहक को खोने से लंबे समय तक नहीं टिक पाएंगे। ब्रिक्स की एकजुटता और वैकल्पिक व्यापार रणनीति ने अमेरिका को मुश्किल में डाला है।
वैश्विक व्यापार युद्ध (टैरिफ वॉर) के बीच ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) ने अमेरिका के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगा है। इस रणनीति के तहत, दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन आयातक देश चीन ने अमेरिका से सोयाबीन खरीद को लगभग बंद कर दिया है और इसके बजाय ब्राजील को अपना प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना लिया है। इस बदलाव ने अमेरिकी किसानों को संकट में डाल दिया है, जिन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी "अमेरिका फर्स्ट" नीति के तहत ब्रिक्स देशों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाए हैं, जिसमें भारत और ब्राजील पर 50% तक टैरिफ और चीन पर 20% टैरिफ शामिल हैं। ट्रंप का मानना है कि ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर के वैश्विक वर्चस्व को चुनौती दे रहे हैं और वैकल्पिक मुद्रा या व्यापारिक व्यवस्था विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस टैरिफ युद्ध की प्रतिक्रिया में, चीन ने अमेरिका से सोयाबीन आयात में भारी कटौती की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर 2025 के लिए चीन ने अमेरिका से एक भी टन सोयाबीन की अग्रिम खरीद (फॉरवर्ड बिक्री) का कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया है। इसके विपरीत, पिछले महीने ही चीन का सोयाबीन आयात साल-दर-साल 19% बढ़ा, जिसमें से 90% आपूर्ति ब्राजील ने की, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी केवल 4% रही। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2023-24 में चीन ने अमेरिका से अपने सोयाबीन आयात का आधा से अधिक हिस्सा खरीदा था।